13 एकड़ से बेदखली के बाद फिर कब्जा! जंगल उजाड़कर दोबारा खेत तैयार, वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल

कवर्धा / पंडरिया। जंगल बचाने के सरकारी दावों के बीच पंडरिया वन परिक्षेत्र में वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। जिस 13 एकड़ वन क्षेत्र से पिछले वर्ष अतिक्रमण हटाकर पौधारोपण कराया गया था, उसी भूमि पर फिर से ट्रैक्टर चलाकर खेत तैयार किए जा रहे हैं। इससे वन विभाग की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बदौरा मार्ग, जामुनपानी, कुल्ही और क्रांति जलाशय के आसपास वन भूमि पर लगातार कब्जे की कोशिशें जारी हैं। सबसे गंभीर स्थिति वन विकास निगम के कक्ष क्रमांक-498 और क्रांति जलाशय के डुबान क्षेत्र में है, जहां 7 एकड़ से अधिक वन भूमि की जुताई कर खेती की तैयारी कर ली गई है। अक्टूबर 2025 में इसी इलाके से करीब 13 एकड़ अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन अब फिर वही जमीन कब्जे की जद में है।
रोज कट रहे पेड़, खुलेआम निकल रही लकड़ी
स्थानीय लोगों के अनुसार बदौरा और आसपास के जंगलों से प्रतिदिन 40 से 50 साइकिलों में जलाऊ लकड़ी निकाली जा रही है। एक-एक साइकिल कई चक्कर लगाकर लकड़ी शहर के होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचा रही है। लंबे समय से जारी इस अवैध गतिविधि पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है।
मैदानी निगरानी कमजोर, अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद
आरोप है कि कई मैदानी कर्मचारी अपने मुख्यालयों में नियमित रूप से नहीं रहते, जिससे जंगलों की निगरानी कमजोर पड़ गई है। इसी का फायदा उठाकर अतिक्रमणकारी पेड़ काटकर वन भूमि को खेत में बदल रहे हैं। बरसात से पहले हर साल यही तरीका अपनाया जाता है और बाद में कब्जा स्थायी रूप लेने लगता है।
सैटेलाइट में दिख रहा जंगल का सिकुड़ना
सैटेलाइट इमेजरी और टाइम-लैप्स मैप में पंडरिया के जंगलों का क्षेत्र लगातार घटता दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद मैदानी स्तर पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से वन संपदा पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
डीएफओ बोले- संयुक्त टीम भेजकर होगी कार्रवाई
जिला वनमंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने कहा कि बदौरा और क्रांति जलाशय के आसपास वन विकास निगम का क्षेत्र भी शामिल है। वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की जांच के लिए संयुक्त टीम भेजकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।




