वनक्षेत्र के तालाब सूखे, प्यासा हिरण गांव में घुसा: कुत्तों से बचते हुए कंटीले तार में फंसा
घायल हिरण का इलाज जारी, ग्रामीणों ने बचाई जान

कवर्धा / ब्रजेश गुप्ता
रेंगाखार जंगल। भीषण गर्मी और जंगल में गहराते जल संकट के कारण वन्यजीव अब गांवों की ओर रुख करने लगे हैं। रेंगाखार वन क्षेत्र में प्यास से बेहाल एक हिरण भटककर तितरी गांव पहुंच गया। उसके पीछे चार आवारा कुत्ते पड़ गए। जान बचाने के लिए हिरण खेतों की ओर भागा, लेकिन वहां लोहे के कंटीले तारों में उलझकर घायल हो गया।
ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए कुत्तों को भगाया और घायल हिरण को तारों से मुक्त कराया। बाद में इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। वन विभाग की टीम हिरण को अपने कब्जे में लेकर इलाज कर रही है।
जंगल में गहराया जल संकट, वन्यजीवों का पलायन शुरू
भीषण गर्मी के बीच रेंगाखार जंगल क्षेत्र में जल संकट गंभीर होता जा रहा है। वन विभाग द्वारा बनाए गए 8 तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। कृत्रिम डबरी या वैकल्पिक जल व्यवस्था नहीं होने से वन्यजीव पानी के लिए भटक रहे हैं। क्षेत्र की नदियों और प्राकृतिक धाराओं का पानी भी खत्म हो चुका है।
पिछले एक महीने में कई बार वन्यजीवों के गांवों में पहुंचने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
महत्वपूर्ण वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है रेंगाखार क्षेत्र
रेंगाखार वन परिक्षेत्र एक महत्वपूर्ण वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर माना जाता है, जो एक ओर भोरमदेव अभयारण्य और दूसरी ओर कान्हा नेशनल पार्क से जुड़ता है। इस क्षेत्र से तेंदुआ, हिरण, सांभर, नीलगाय और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही होती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार हो रहे अवैध रेत उत्खनन से नदियों के प्राकृतिक जलस्रोत खत्म हो गए हैं। इससे जंगल में पानी का संकट और गहरा गया है।
रोज हो रहा अवैध रेत परिवहन
ग्रामीणों के अनुसार, रेंगाखार क्षेत्र में रोज करीब 50 ट्रैक्टर रेत का अवैध परिवहन कर रहे हैं। दिन के साथ-साथ रात में भी ट्रैक्टर-ट्रालियों से रेत ढोई जा रही है। एक ट्रैक्टर रेत की कीमत 3 से 4 हजार रुपए तक बताई जा रही है। इस तरह हर महीने लाखों रुपए का अवैध कारोबार जंगल के भीतर चल रहा है।
मंगलवार को स्थानीय नदी के निरीक्षण में सूखी नदी से ट्रैक्टर-ट्रालियों में रेत भरते मजदूर दिखाई दिए। जंगल के रास्तों से लगातार रेत परिवहन होता नजर आया।
वन विभाग का पक्ष
सहसपुर लोहारा वन परिक्षेत्र के एसडीओ शिवेंद्र भगत ने कहा कि जंगल में वन्यजीवों के लिए पानी के कुछ स्रोत मौजूद हैं। उन्होंने संबंधित रेंज अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कही। साथ ही अवैध रेत परिवहन पर समय-समय पर कार्रवाई किए जाने का दावा भी किया।




