केशदा-इकलामा लौह अयस्क ब्लॉक अब सरकारी कंपनी के लिए आरक्षित करने की तैयारी, 755 से बढ़ाकर 1190 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित

कवर्धा। कबीरधाम जिले के केशदा-इकलामा लौह अयस्क ब्लॉक को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। वर्ष 2022 में निजी कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पॉन इंडिया लिमिटेड को आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब यह ब्लॉक सरकारी उपक्रम छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएमडीसी) को सौंपने की दिशा में कार्रवाई तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने सीएमडीसी के पक्ष में 1190 हेक्टेयर क्षेत्र आरक्षित करने का प्रस्ताव संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म को भेज दिया है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जिस ब्लॉक का क्षेत्रफल निजी कंपनी के लिए 755.039 हेक्टेयर प्रस्तावित था, उसे अब बढ़ाकर 1190 हेक्टेयर कर दिया गया है। यानी करीब 435 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को भी प्रस्तावित खनन क्षेत्र में शामिल किया गया है।
वर्ष 2022 की ई-नीलामी में आर्सेलर मित्तल निप्पॉन इंडिया लिमिटेड ने 117.55 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी की सबसे ऊंची बोली लगाकर प्रीफर्ड बिडर का दर्जा हासिल किया था। लेकिन वर्ष 2023 में भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य के संशोधित ईको-सेंसिटिव जोन की अधिसूचना जारी होने के बाद परियोजना पर्यावरणीय अड़चनों में फंस गई। प्रस्तावित 755.039 हेक्टेयर वन भूमि में से लगभग 264.920 हेक्टेयर क्षेत्र अभयारण्य के बफर जोन में आने पर वन विभाग ने आपत्ति दर्ज की। इसके चलते शासन ने नवंबर 2025 में कंपनी का आशय पत्र (एलओआई) निरस्त कर दिया।
निजी कंपनी के बाहर होने के बाद सीएमडीसी ने एमएमडीआर अधिनियम की धारा 17(ए) के तहत पूरे ब्लॉक को अपने पक्ष में आरक्षित करने के लिए आवेदन किया। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय की खनिज शाखा ने संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, नवा रायपुर को पत्र भेजकर बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र पर वर्तमान में किसी अन्य खनिज रियायत का अधिकार नहीं है, इसलिए इसे सीएमडीसी के लिए आरक्षित किया जा सकता है।
हालांकि प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंची है। जिला स्तरीय लैंड शेड्यूलिंग (खनिज) समिति 1190 हेक्टेयर क्षेत्र का तकनीकी परीक्षण कर रही है। समिति की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही आरक्षण और आगे की खनन प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन पर्यावरणीय कारणों से निजी कंपनी की परियोजना निरस्त हुई थी, उन्हीं क्षेत्रों में सरकारी कंपनी पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए परियोजना को किस प्रकार आगे बढ़ाती है।
फैक्ट फाइल
755.039 हेक्टेयर – निजी कंपनी के लिए प्रस्तावित क्षेत्र
1190 हेक्टेयर – सीएमडीसी के लिए प्रस्तावित क्षेत्र
करीब 435 हेक्टेयर – अतिरिक्त क्षेत्र शामिल
117.55% – वर्ष 2022 की सर्वोच्च बोली
नवंबर 2025 – एलओआई निरस्त
मुख्य कारण – भोरमदेव अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव जोन से जुड़ी पर्यावरणीय बाधाएं





