करोड़ों की नहर, पहली बारिश में दरार: चार महीने में ही निर्माण पर उठे सवाल

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा/रेंगाखार जंगल
रेंगाखार जंगल के गोपीखार बांध और नहर में दो साल पहले हुई तबाही के बाद करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई नई सीसी नहर लाइनिंग पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 2 करोड़ 24 लाख 10 हजार रुपए की लागत से बनाई गई नहर का काम मार्च 2026 में पूरा हुआ था। महज चार महीने बाद अगस्त की बारिश में लाइनिंग में 20 से ज्यादा जगहों पर गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। दरार वाले स्थानों पर विभाग ने लाल निशान भी लगाए हैं।
नई नहर में इतनी जल्दी दरारें आने से निर्माण की गुणवत्ता, बेस की मजबूती और विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सीसी लाइनिंग से पहले नीचे की मिट्टी और बेस की पर्याप्त कुटाई नहीं की गई। रोलर से बेस को मजबूत तरीके से तैयार नहीं किए जाने के कारण बारिश में जमीन दबने से लाइनिंग में दरारें आई हैं।
2024 में फूटा था बांध, नहर का 60 फीसदी हिस्सा हुआ था तबाह
गोपीखार बांध का मूल निर्माण वर्ष 1978-80 के बीच हुआ था। सितंबर 2024 में भारी बारिश के दौरान जलाशय के गेट के पास बड़ा होल हो गया था। पानी के दबाव के चलते बंधान क्षतिग्रस्त हो गया और करीब 5 किलोमीटर लंबी नहर का लगभग 60 फीसदी हिस्सा भी तबाह हो गया था। इसके बाद किसानों ने नहर को मजबूत तरीके से बनाने की मांग की थी।
इसके बाद करीब 2.24 करोड़ रुपए की लागत से नई सीसी लाइनिंग नहर का निर्माण शुरू किया गया। निर्माण जून 2025 में शुरू हुआ और विभाग के अनुसार मार्च 2026 में काम पूरा कर लिया गया। लेकिन पहली ही बारिश में कई स्थानों पर दरारें सामने आने लगीं।
फिर न बह जाए नहर, किसानों को सता रहा डर
रेंगाखार जंगल और आसपास के कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए इसी नहर पर निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि अभी नहर में पानी का दबाव बढ़ा तो मौजूदा दरारें और चौड़ी हो सकती हैं। इससे सीसी लाइनिंग क्षतिग्रस्त होने के साथ पानी के रिसाव का खतरा भी बढ़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस नहर को पिछली आपदा के बाद मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए, उसमें महज कुछ महीनों में दरारें आना गंभीर मामला है। उन्होंने बारिश खत्म होने का इंतजार करने के बजाय अभी विशेषज्ञों से नहर की तकनीकी जांच कराने और निर्माण की गुणवत्ता की जांच की मांग की है।
जहां-जहां क्रैक, वहां लगाए लाल निशान
मौके पर नहर की सीसी लाइनिंग में कई जगह दरारें दिखाई दे रही हैं। कुछ स्थानों पर दरारें लंबाई में हैं, जबकि कई जगह कंक्रीट के हिस्से में क्रैक नजर आ रहे हैं। विभाग ने दरार वाले स्थानों पर लाल निशान लगाए हैं, ताकि प्रभावित हिस्सों की पहचान की जा सके।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण के कुछ ही महीनों बाद लाइनिंग में दरारें आ गई हैं तो क्या निर्माण के दौरान बेस तैयार करने, कंक्रीट की गुणवत्ता और तकनीकी मापदंडों का सही तरीके से पालन किया गया था?
ईई बोले- बारिश के बाद कराया जाएगा दुरुस्त
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता मनोज पराते ने कहा कि मामला विभाग के संज्ञान में है। जिन स्थानों पर दिक्कतें सामने आई हैं, वहां निशान लगाए गए हैं। बारिश के बाद नहर को दुरुस्त कराया जाएगा। निर्माण के बाद एक सीजन तक काम ठेकेदार की गारंटी में रहता है। बारिश के बाद कहीं-कहीं जमीन दबने की स्थिति बनती है। फिलहाल विभाग की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




