परीक्षा कल से, कोर्स अधूरा! 95 दिन में 24 दिन छुट्टी, सिर्फ 71 दिन पढ़ाई; अब अतिरिक्त कक्षाओं से कोर्स पूरा कराने की तैयारी

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
तिमाही परीक्षा सिर पर है और कई सरकारी स्कूलों में पाठ्यक्रम अभी पूरा नहीं हुआ है। नया शिक्षा सत्र शुरू हुए 95 दिन हो चुके हैं, लेकिन इनमें 24 दिन रविवार और शासकीय अवकाश की भेंट चढ़ गए। विद्यार्थियों को नियमित कक्षा के लिए महज 71 दिन मिले। अब 21 से 26 सितंबर तक तिमाही परीक्षा होगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पढ़ाई के लिए दिन ही कम मिले तो अधूरे पाठ्यक्रम से परीक्षा की तैयारी कैसे पूरी होगी?
शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सत्र 16 जून से शुरू हुआ। जून में 11 दिन, जुलाई में 27 दिन और अगस्त में करीब 21 दिन कक्षाएं लगीं। सितंबर में भी अब तक रविवार के कारण अवकाश रहा। इस तरह परीक्षा से पहले उपलब्ध शिक्षण दिवस सीमित रह गए हैं।
25% तक कोर्स अधूरा, बच्चों पर परीक्षा का दबाव
जिले के कई स्कूलों में करीब 25 फीसदी तक पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने की स्थिति सामने आई है। हालांकि हर स्कूल की स्थिति एक जैसी नहीं है। कहीं शिक्षक पर्याप्त हैं तो कहीं शिक्षकों की कमी है। कहीं स्कूल भवन की समस्या है तो कहीं एक शिक्षक को दूसरी जिम्मेदारी दिए जाने से नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं।
अब विभाग ने ऐसे स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर पाठ्यक्रम पूरा कराने की बात कही है। लेकिन परीक्षा से ठीक पहले अतिरिक्त कक्षाओं से कितना पाठ्यक्रम पूरा हो पाएगा, यह बड़ा सवाल है।
लोखान में 34 बच्चे, दो शिक्षक; एक शिक्षक समन्वयक
पंडरिया क्षेत्र के लोखान प्राथमिक स्कूल की स्थिति व्यवस्था की एक तस्वीर सामने रखती है। यहां 34 बच्चे और दो शिक्षक हैं। इनमें एक प्रधानपाठक हैं, जबकि दूसरे शिक्षक को करीब 20 किलोमीटर दूर बिरकोना में समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है।
यानी स्कूल में पांच कक्षाओं को संभालने के लिए नियमित रूप से शिक्षक उपलब्धता का दबाव बना हुआ है। ऊपर से स्कूल की अपनी बिल्डिंग भी नहीं है। बच्चों की पढ़ाई पंचायत भवन में चल रही है।
एक ही जगह पांच कक्षाएं, भवन का इंतजार
लोखान स्कूल में एक साथ पांच कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। बालिकाओं के लिए शौचालय है, लेकिन बालकों के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं है। पंचायत की ओर से स्कूल भवन और अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की गई है।
अब विभाग का जवाब—अतिरिक्त कक्षाएं लगाएं
जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा का कहना है कि तिमाही परीक्षा का टाइम टेबल डीपीआई ने पहले ही जारी किया है और स्कूलों को समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन स्कूलों में पाठ्यक्रम अधूरा है, वहां अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर कोर्स पूरा कराया जाएगा।
बड़ा सवाल
जब 95 दिनों में 24 दिन अवकाश में निकल गए और बच्चों को सिर्फ 71 दिन कक्षा में बैठने का मौका मिला, तो अधूरे पाठ्यक्रम के बीच तिमाही परीक्षा का दबाव आखिर किस पर पड़ेगा—व्यवस्था पर या बच्चों पर?




