डीपीआर और स्वीकृति के फेर में अटकी पेयजल योजनाएं, हजारों ग्रामीणों को नहीं मिली राहत

कवर्धा/ ब्रजेश गुप्ता
वनांचल क्षेत्र के 120 से अधिक गांवों में पेयजल संकट दूर करने के लिए करीब 190 करोड़ रुपए की दो महत्वाकांक्षी पेयजल योजनाएं अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। योजनाओं के तहत 50 हजार से अधिक ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा किया गया था, लेकिन स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण आज भी हजारों परिवार पानी के लिए जूझ रहे हैं।
मई 2025 में दलदली क्षेत्र के लिए कन्हई नदी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर पेयजल आपूर्ति की घोषणा की गई थी। हालांकि विभागीय सर्वे में सामने आया कि कन्हई नदी में पूरे साल पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं रहता। इसके बाद योजना में बदलाव करते हुए अब जल जीवन मिशन के तहत वैकल्पिक व्यवस्था से पानी उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इस कारण मूल योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसी तरह रामपुर (ठाठापुर), दशरंगपुर, इंदौरी, मस्का सहित 54 गांवों को सुतियापाट जलाशय से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 72 करोड़ रुपए की मल्टी विलेज योजना बनाई गई थी। योजना के तहत भैंसबोड़ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और गांवों तक पाइपलाइन बिछाई जानी है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।
बोड़ला ब्लॉक में भी छीरपानी जलाशय से 66 गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए 118.02 करोड़ रुपए की योजना तैयार की गई है। इसके तहत भोंदा में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना है। डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से योजना लंबित है। कुसुमघटा, बैजलपुर, राजानवागांव सहित कई गांवों के लोग अब भी पाइपलाइन बिछने का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में केवल एक-दो हैंडपंप ही चालू हैं। गर्मी के दिनों में लोगों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। कई स्थानों पर मजबूरी में दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बना हुआ है।
पीएचई विभाग का पक्ष
पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता डी.एस. राजपूत ने बताया कि दोनों योजनाओं का विस्तृत सर्वे और डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। शासन से स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
योजनाओं की प्रमुख बातें
सुतियापाट जलाशय योजना : 72 करोड़ रुपए, 54 गांव लाभान्वित, भैंसबोड़ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट।
छीरपानी जलाशय योजना : 118.02 करोड़ रुपए, 66 गांव लाभान्वित, भोंदा में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट।
कुल लागत : लगभग 190 करोड़ रुपए।
लाभार्थी आबादी : 50 हजार से अधिक ग्रामीण।


