भीषण जल संकट: पंडरीपानी के ग्रामीण जंगल के चेकडैम का पानी पीने को मजबूर

कवर्धा जिले के पंडरिया ब्लॉक के आश्रित गांव पंडरीपानी में इस साल गर्मी ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। लगभग 90 परिवारों वाला यह गांव आज पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। गांव का एकमात्र हैंडपंप पूरी तरह सूख चुका है, जिससे ग्रामीणों की जिंदगी संकट में आ गई है।
सुबह सूरज निकलने से पहले ही गांव की महिलाएं खाली बर्तन लेकर जंगल की ओर निकल पड़ती हैं। करीब आधा से एक किलोमीटर दूर स्थित चेकडैम ही अब उनका एकमात्र सहारा है। वहां जमा पानी दिखने में साफ जरूर है, लेकिन उसकी गुणवत्ता संदिग्ध है—फिर भी मजबूरी में वही पानी पीने, खाना बनाने और अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
🌱 भूजल स्तर गिरने से बढ़ा संकट
पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग (PHE) की रिपोर्ट के अनुसार पंडरिया और कुंडा क्षेत्र में भूजल स्तर 110 फीट से भी नीचे चला गया है। इसका मुख्य कारण क्षेत्र में गन्ने की अत्यधिक खेती और सिंचाई के लिए भूजल का लगातार दोहन बताया जा रहा है। इससे हैंडपंप और बोरवेल बेकार हो गए हैं।
🚶♀️ महिलाओं पर सबसे ज्यादा बोझ
पानी की इस कमी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। रोजाना कई चक्कर लगाकर पानी लाना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। इससे न केवल उनका समय और श्रम खर्च हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
🏞️ आसपास के गांवों में भी यही हाल
सिर्फ पंडरीपानी ही नहीं, बल्कि घुड़सी, वेपरापानी, शीतलपानी, सौरा, कुंडापानी और बसूलालूट जैसे कई गांव भी इसी संकट से जूझ रहे हैं। कहीं हैंडपंप सूख चुके हैं, तो कहीं ग्रामीण पहाड़ों में झिरिया खोदकर पानी निकालने को मजबूर हैं।
💰 सरकारी योजना अभी कागजों में
PHE विभाग के कार्यपालन अभियंता दिलीप सिंह राजपूत ने बताया कि जल संकट से निपटने के लिए 3.70 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर खनिज न्यास (DMF) मद से स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इसमें इंटेकवेल निर्माण और पाइपलाइन विस्तार की योजना शामिल है। हालांकि, जब तक यह योजना जमीन पर नहीं उतरती, ग्रामीणों की परेशानी बनी रहेगी।
❗ निष्कर्ष
पंडरीपानी और आसपास के गांवों की स्थिति यह बताती है कि जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण की अनदेखी कितनी गंभीर समस्या बन सकती है। तत्काल राहत और दीर्घकालिक समाधान दोनों की जरूरत है, वरना यह संकट और गहराता जाएगा।




