कागजों में 15 करोड़ का 53 हजार क्विंटल धान जाम, 78 खरीदी केंद्रों में एक दाना तक नहीं; जांच तेज

कवर्धा। जिले में धान खरीदी समाप्त हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में अब भी 53 हजार क्विंटल धान खरीदी केंद्रों में जाम दर्शाया जा रहा है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वहीं जमीनी हकीकत यह है कि 78 समितियों में धान का एक दाना भी मौजूद नहीं मिला, जिससे रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच बड़े अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में कुल 108 धान खरीदी केंद्र संचालित हुए थे। इनमें से 30 केंद्रों से धान का पूरी तरह उठाव हो चुका है, जबकि 78 केंद्रों में रिकॉर्ड के अनुसार धान लंबित है। हालांकि मौके पर किए गए निरीक्षण में अधिकांश केंद्रों पर धान का स्टॉक नहीं मिला।
दो केंद्रों की स्थिति ने बढ़ाई चिंता
जिंदा खरीदी केंद्र में सरकारी रिकॉर्ड में 100 क्विंटल से अधिक धान दर्ज है, लेकिन मौके पर केवल खाली बोरे मिले। वहीं कामठी खरीदी केंद्र में रिकॉर्ड के अनुसार एक हजार क्विंटल से अधिक धान जाम है, जबकि भौतिक सत्यापन में वहां भी धान नहीं मिला।
6 समितियों में गड़बड़ी प्रमाणित, 10 पर एफआईआर
प्रशासनिक जांच में अब तक 6 समितियों में लगभग 8,400 क्विंटल धान के गबन की पुष्टि हो चुकी है। इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला व्यापक जांच का हिस्सा है और अन्य केंद्रों की भी जांच जारी है।
उठ रहे हैं कई सवाल
यदि खरीदी केंद्रों में धान मौजूद नहीं है तो राइस मिलर्स को आखिर क्या सौंपा गया? क्या धान का अवैध रूप से विक्रय किया गया या रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां की गईं? साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि धान खरीदी समाप्त होने के बाद भी समय पर भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया गया।
जांच के लिए गठित हुई टीमें
जिला खाद्य अधिकारी चंद्रशेखर देवांगन ने बताया कि 6 समितियों में गड़बड़ी प्रमाणित होने के बाद 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। जिंदा और कामठी सहित शेष समितियों में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के अंतर की जांच के लिए टीमें गठित की गई हैं। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।





