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ड्राइविंग टेस्ट के लिए अब 26 किमी दूर दशरंगपुर जाना पड़ सकता है, जिले में हर साल बनते हैं 3 हजार लाइसेंस

कवर्धा। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ई-ट्रैक) स्थापित किए जा रहे हैं। कबीरधाम जिले में भी इस व्यवस्था के लिए भूमि चिन्हित की गई है, लेकिन प्रस्तावित स्थान की दूरी को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।
परिवहन विभाग ने पिपरिया तहसील के ग्राम दशरंगपुर स्थित खसरा क्रमांक 337/1 की लगभग तीन एकड़ शासकीय भूमि ई-ट्रैक निर्माण के लिए प्रस्तावित की है। यह स्थान जिला मुख्यालय स्थित आरटीओ कार्यालय से करीब 26 किलोमीटर दूर है। भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले के वाहन चालकों को ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए दशरंगपुर तक जाना पड़ सकता है।
जिले में प्रतिवर्ष औसतन तीन हजार से अधिक नए ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाते हैं। ऐसे में टेस्ट केंद्र की दूरी आम नागरिकों के लिए अतिरिक्त समय और खर्च का कारण बन सकती है।
वर्तमान व्यवस्था में सड़क और मैदानों में हो रहा टेस्ट
जिले में अभी तक परिवहन विभाग के पास अपना स्थायी ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक नहीं है। इसके चलते आवेदकों का परीक्षण आरटीओ कार्यालय के बाहर की सड़क, पीजी कॉलेज मैदान अथवा स्वामी करपात्री मैदान में कराया जाता है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और परीक्षण प्रक्रिया भी पूरी तरह मानकीकृत नहीं हो पाती।
रायपुर मॉडल पर बनेगा ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर
जिले में भारी एवं व्यावसायिक वाहनों के चालकों के प्रशिक्षण के लिए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (डीटीसी) का निर्माण भी किया जा रहा है। यह केंद्र राष्ट्रीय राजमार्ग के पास ग्राम प्रभाटोला-लेंजाखार बायपास मार्ग पर पोंड़ी क्षेत्र में विकसित हो रहा है, जो कवर्धा शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित है।
सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी (पीपीपी मॉडल) से संचालित होने वाला यह केंद्र रायपुर के आईडीटीआर मॉडल की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। यहां आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को मिलेगी राहत
डीटीसी से प्रशिक्षण लेकर सफलतापूर्वक पास होने वाले अभ्यर्थियों को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अलग से ड्राइविंग टेस्ट देने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रशिक्षण केंद्र द्वारा जारी प्रमाणपत्र ही लाइसेंस जारी करने का आधार बनेगा। इससे आवेदकों को समय और प्रक्रिया दोनों में राहत मिलने की उम्मीद है।
शहर के आसपास उपयुक्त भूमि नहीं मिलने से बढ़ी दूरी
आरटीओ गौरव पाटले के अनुसार, ऑटोमेटेड ई-ट्रैक के लिए कम से कम तीन एकड़ शासकीय भूमि की आवश्यकता है। शहर के निकट उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण दशरंगपुर स्थित भूमि का चयन कर आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
परिवहन विभाग पिछले तीन वर्षों से ई-ट्रैक के लिए भूमि की तलाश कर रहा था, लेकिन मुख्यालय के आसपास उपयुक्त स्थान नहीं मिलने के कारण अब दूरस्थ क्षेत्र में परियोजना स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, नई व्यवस्था से ड्राइविंग परीक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनने की उम्मीद है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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