चार ब्लॉक अस्पतालों में मेडलेपार सिस्टम ठप, ऑनलाइन रिपोर्टिंग शून्य; मरीज, पुलिस और न्याय व्यवस्था पर पड़ रहा असर

बृजेश गुप्ता
कवर्धा। डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के दावों के बीच कबीरधाम जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मेडिकल-लीगल मामलों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया मेडलेपार (Medical Legal Examination and Postmortem Reporting System) जिले में लगभग निष्क्रिय साबित हो रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण चार प्रमुख ब्लॉक अस्पतालों में आज तक एक भी मेडिकल-लीगल केस (एमएलसी) या पोस्टमार्टम (पीएम) रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज नहीं की गई है।
चारों ब्लॉक अस्पतालों में ऑनलाइन रिपोर्टिंग का रिकॉर्ड शून्य
जानकारी के अनुसार बोड़ला, पंडरिया, सहसपुर लोहारा और पिपरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडलेपार पोर्टल पर एक भी रिपोर्ट अपलोड नहीं हुई है। अधिकांश मामलों में अब भी दशकों पुरानी कागजी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिला अस्पताल में भी केवल प्रतीकात्मक रूप से 5–6 रिपोर्ट ही ऑनलाइन दर्ज की गई हैं।
प्रशिक्षण के बाद भी नहीं बदली कार्यशैली
मेडलेपार प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस विभाग द्वारा एसपी कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके बावजूद अधिकांश अस्पतालों में ऑनलाइन रिपोर्टिंग शुरू नहीं हो सकी। स्वास्थ्य विभाग ने पोर्टल के सॉफ्टवेयर अपडेट को देरी का कारण बताया, लेकिन अपडेट पूरा होने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया।
ऑनलाइन व्यवस्था लागू नहीं होने से बढ़ रही परेशानियां
मेडलेपार सिस्टम के प्रभावी क्रियान्वयन न होने से कई गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं—
सड़क दुर्घटना, मारपीट और संदिग्ध मौत जैसे मामलों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से विलंबित हो रही है।
एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट थानों तक पहुंचने में कई दिन या सप्ताह लग जाते हैं, जिससे चार्जशीट दाखिल करने में भी देरी होती है।
पीड़ितों और उनके परिजनों को बीमा दावा, मुआवजा और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अस्पताल और पुलिस कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
हस्तलिखित रिपोर्टों में अस्पष्ट लेखन, दस्तावेज गुम होने या रिकॉर्ड में हेरफेर जैसी आशंकाएं बनी रहती हैं, जबकि डिजिटल प्रणाली में प्रत्येक एंट्री का टाइम-स्टैम्प दर्ज होने से पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
एएसपी बोले—अभी भी कागजी रिपोर्ट ही मिल रही
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं सीसीटीएनएस प्रभारी पुष्पेंद्र बघेल ने बताया कि मेडलेपार योजना को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शुरुआती दौर में कुछ रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज हुई थीं, लेकिन वर्तमान में अधिकांश एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अस्पतालों से अब भी ऑफलाइन (कागजी) रूप में ही प्राप्त हो रही हैं।
सीएमएचओ ने दिए कार्रवाई के संकेत
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.के. तुरे ने स्वीकार किया कि ब्लॉक स्तर पर ऑनलाइन एंट्री की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन रिपोर्टिंग नहीं करने वाले डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा।
प्रश्न यह है…
जब सरकार न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए आधुनिक व्यवस्था लागू कर चुकी है, तब कबीरधाम के अधिकांश अस्पताल अब भी फाइलों और कागजों के सहारे क्यों चल रहे हैं? यदि समय रहते मेडलेपार प्रणाली को पूरी तरह लागू नहीं किया गया, तो इसका खामियाजा मरीजों, पीड़ित परिवारों, पुलिस और न्याय व्यवस्था—सभी को भुगतना पड़ता रहेगा।





