तीन साल पहले लगे खंभे-ट्रांसफॉर्मर, फिर भी हड़ही के 70 बैगा परिवार अंधेरे में; करोड़ों की सड़क भी अधूरी

कवर्धा। जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पीपरखुंटा के आश्रित ग्राम हड़ही में आज भी विकास की बुनियादी सुविधाएं लोगों की पहुंच से दूर हैं। मध्यप्रदेश सीमा से लगे इस वनांचल गांव में तीन वर्ष पहले बिजली के खंभे और ट्रांसफॉर्मर लगाए गए, लेकिन अब तक किसी भी घर को बिजली कनेक्शन नहीं मिल सका है। करीब 70 बैगा परिवार आज भी चिमनी और ढिबरी की रोशनी में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पहले लगाए गए अधिकांश सोलर सिस्टम भी खराब हो चुके हैं। शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। बिजली की सुविधा नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कामकाज और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
कनेक्शन शुल्क बना बाधा
ग्रामीणों ने बताया कि विद्युतीकरण कार्य के बाद बिजली कंपनी ने प्रत्येक परिवार से लगभग 2,100 रुपये कनेक्शन शुल्क जमा करने को कहा था। आर्थिक रूप से कमजोर बैगा परिवार यह राशि जमा नहीं कर सके, जिसके चलते आज तक बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाया।
तरेगांव जंगल सब-स्टेशन के कनिष्ठ अभियंता तामेश बारले ने बताया कि पहले गांव में सोलर सिस्टम से बिजली व्यवस्था थी। वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद विद्युत लाइन बिछाई गई, लेकिन ग्रामीण कनेक्शन शुल्क जमा नहीं कर सके। अब धरती आबा जनजाति उत्कर्ष ग्राम अभियान के तहत पात्र परिवारों को बिजली कनेक्शन देने की तैयारी की जा रही है।
3.40 करोड़ की सड़क भी अधूरी
हड़ही तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत 3.40 करोड़ रुपये की लागत से पांच किलोमीटर सड़क (जिसमें दो किलोमीटर सीसी रोड शामिल है) स्वीकृत की गई थी। निर्माण स्थल पर लगे बोर्ड में कार्य पूर्ण होने की तिथि मार्च 2025 दर्ज है, लेकिन मौके पर सड़क का निर्माण अधूरा दिखाई देता है। कई स्थानों पर केवल मिट्टी और मुरुम डाला गया है, जबकि पुल-पुलियों का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है।
बारिश के दौरान सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे हड़ही सहित पीपरखुंटा, साजाटोला, कोयलारी और बाघमाड़ा जैसे गांवों का आवागमन प्रभावित होता है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में बिजली और सड़क की सुविधा पूरी तरह उपलब्ध हो जाए तो बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और खेती-किसानी में काफी सुधार होगा। उनका आरोप है कि तीन साल से बिजली के खंभे और ट्रांसफॉर्मर केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।
अधिकारियों का पक्ष
पीएमजीएसवाई बोड़ला के एसडीओ सौरभ देशमुख ने बताया कि सड़क निर्माण कार्य में फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने में हुई देरी के कारण निर्माण प्रभावित हुआ। उनके अनुसार अब कार्य में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।





