कबीरधाम शिक्षा विभाग में ₹1.04 करोड़ की गड़बड़ी ‘स्मृति’ ने छापी उत्तरपुस्तिकाएं, भुगतान ‘प्रगति’ को

ब्रजेश गुप्ता | कवर्धा
कबीरधाम शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। पहले कवर्धा बीईओ कार्यालय में 218 करोड़ रुपए के खर्च का हिसाब गायब होने का मामला सामने आया था, जिसमें तत्कालीन प्रभारी बीईओ संजय जायसवाल को निलंबित किया गया। अब जिला शिक्षा विभाग में परीक्षा सामग्री छपाई और भुगतान से जुड़ा 1.04 करोड़ रुपए का नया मामला उजागर हुआ है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में स्कूली परीक्षाओं के लिए उत्तरपुस्तिकाओं और परीक्षा सामग्री की छपाई का कार्य मेसर्स स्मृति प्रिंट हाउस, रायपुर को दिया गया था। निविदा और बिल भी इसी फर्म के नाम पर प्रस्तुत किए गए। लेकिन भुगतान संबंधित फर्म के खाते में न जाकर मेसर्स प्रगति बाइंडर्स, टाटीबंध रायपुर के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
संचालनालय कोष एवं लेखा (ऑडिट प्रकोष्ठ) की जांच में खुलासा हुआ कि करीब 41.15 लाख रुपए की राशि दूसरी फर्म को भुगतान की गई, जिसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस फर्म से कार्य कराया गया, उसे भुगतान न कर किसी अन्य फर्म को राशि देना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
डीईओ कार्यालय का जवाब असंतोषजनक
जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से इस संबंध में जवाब मांगा गया, तो अधिकारियों ने तर्क दिया कि परीक्षा संचालन के लिए राशि पहले से निकालकर सुरक्षित रखी गई थी। हालांकि ऑडिट टीम ने इस जवाब को असंतोषजनक बताते हुए कहा कि राशि अग्रिम रूप से आहरित कर चेक के माध्यम से भुगतान की गई। संबंधित फर्म के खाते में सीधे राशि अंतरित नहीं की गई और गोपनीयता संबंधी आवश्यक वचन पत्र भी नहीं लिया गया।
बजट लैप्स से बचाने पहले निकाली गई राशि
जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2025 में बजट लैप्स होने की आशंका के चलते डीईओ कार्यालय ने कई देयक बनाकर लगभग 1.04 करोड़ रुपए विभागीय चालू खाते में ट्रांसफर कर लिए। जबकि वित्त विभाग के नियमों के अनुसार 500 रुपए से अधिक का भुगतान सीधे वेंडर के खाते में ई-पेमेंट के जरिए किया जाना चाहिए।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य के संभावित खर्च के अनुमान पर राशि अग्रिम निकालना नियम विरुद्ध है। इसके बावजूद विभाग ने पहले बड़ी राशि खाते में जमा की और बाद में सेल्फ चेक तथा आंतरिक ट्रांसफर के माध्यम से भुगतान किए।
45 दिन में मांगा गया जवाब, अब तक नहीं भेजे दस्तावेज
संचालनालय कोष एवं लेखा ने फरवरी 2026 में जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर 45 दिनों के भीतर जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि अब तक पूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
कबीरधाम जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा ने कहा कि ऑडिट आपत्ति के निराकरण के लिए उच्च कार्यालय से पालन प्रतिवेदन मांगा गया है और जानकारी भेजने के लिए दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं।





