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अंधेरी गुफा में प्रकृति का अद्भुत संसार, चूना पत्थरों पर उभरी रहस्यमयी आकृतियां

देवसरा पंचायत की पहचान बनी दतराम गुफा

कवर्धा। ब्रजेश गुप्ता
देवसरा गांव की वीरान पहाड़ियों के भीतर छुपी दतराम गुफा आज क्षेत्र की अनोखी पहचान बन चुकी है। बाहर से सामान्य दिखाई देने वाली यह गुफा अपने भीतर प्रकृति की हजारों वर्षों पुरानी अद्भुत कलाकृतियां समेटे हुए है। अंधेरे और रहस्य से भरी इस गुफा की तुलना अब लोग बस्तर की प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा से करने लगे हैं।
दतराम गुफा तक पहुंचना आसान नहीं है। पहले करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर चढ़ना पड़ता है, फिर संकरे रास्तों से नीचे उतरने के बाद गुफा का प्रवेश द्वार दिखाई देता है। भीतर कदम रखते ही पत्थरों, पानी और अंधेरे की एक अलग दुनिया शुरू हो जाती है।
गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यहां चूना पत्थरों से बनी प्राकृतिक आकृतियां हैं। वर्षों तक छत से टपकती पानी की बूंदों ने पत्थरों को तराशकर अनोखे आकार दिए हैं। कहीं ये आकृतियां शिवलिंग जैसी दिखाई देती हैं तो कहीं गणेश प्रतिमा, शंख, नारियल और बिल्व पत्र जैसी संरचनाएं नजर आती हैं। कुछ जगहों पर बनी आकृतियां नरकंकाल जैसी प्रतीत होती हैं, जिन्हें देखकर लोग रोमांचित हो उठते हैं।
विशेषज्ञ इन संरचनाओं को स्टेलेक्टाइट और स्टेलेग्माइट कहते हैं, लेकिन गांव के लोगों के लिए यह प्रकृति का चमत्कार है। गुफा के भीतर एक प्राकृतिक कुंड भी मौजूद है, जिसमें बारहों महीने पानी भरा रहता है। इसी नमी के कारण अंदर दलदली वातावरण बना रहता है।
गुफा की छतों पर चमगादड़ लटके रहते हैं और अंधेरे में उनके पंखों की आवाज वातावरण को और रहस्यमयी बना देती है। भीतर कई संकरी सुरंगें भी हैं, जहां लोगों को घुटनों के बल चलकर आगे बढ़ना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गुफा के कई रास्ते अब तक पूरी तरह खोजे नहीं जा सके हैं।
पंचायत का संक्षिप्त परिचय
पंचायत: ग्राम पंचायत देवसरा
जनसंख्या: लगभग 1200
साक्षरता दर: 72 प्रतिशत
कनेक्टिविटी: पंडरिया से लगभग 20 किलोमीटर दूर, पक्की सड़क से जुड़ा गांव
प्रमुख स्थल: दतराम गुफा, जैन तीर्थ बकेला कंकालिन टोला
देवसरा पंचायत की यह रहस्यमयी गुफा अब पर्यटन और शोध का नया केंद्र बनती जा रही है। प्राकृतिक धरोहर के रूप में दतराम गुफा क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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