20 दिन में फटने लगी 64 करोड़ की सड़क, बेस तक पहुंचीं दरारें
तकनीकी जांच, कोर टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण की मांग तेज

कवर्धा / पंडरिया-मुंगेली रोड पर नेशनल हाईवे-130 (ए) के तहत बन रही करोड़ों रुपए की कंक्रीट सड़क निर्माण पूरा होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 64 करोड़ रुपए की लागत से पंडरिया, पोंडी, मुंगेली और तखतपुर क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन पंडरिया शहर के भीतर बनी सड़क में महज 20 दिन के भीतर गहरी दरारें दिखाई देने लगी हैं।
पंडरिया में पेट्रोल पंप से रौहा तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी कंक्रीट सड़क बनाई जा रही है। मैनपुरा के पास सड़क के एक हिस्से में ऊपर से नीचे बेस तक लंबी दरार साफ नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर अभी नियमित यातायात भी शुरू नहीं हुआ है, इसके बावजूद इस तरह की खराबी सामने आना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सड़क की पूरी चौड़ाई में दिखीं दरारें
स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों के अनुसार सड़क में विकसित क्रैक केवल सतही नहीं हैं, बल्कि नीचे बेस लेयर तक जाते दिखाई दे रहे हैं। इससे कंक्रीट मिश्रण, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, क्योरिंग प्रक्रिया और तकनीकी निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि समय रहते तकनीकी जांच, कोर टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से पहले सुधार किया जा सके।
निर्माण स्थल पर अव्यवस्था, दुर्घटना का खतरा
निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक मार्ग की समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने से जिला सहकारी बैंक के पास दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़क के कई हिस्सों में लोहे की सरिया और अधूरा निर्माण खुले में पड़ा हुआ है, जिससे हादसे की आशंका बढ़ गई है।
धूल और क्योरिंग की समस्या से लोग परेशान
स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इसके कारण पूरे इलाके में धूल का गुबार बना रहता है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो धूल नियंत्रण पर ध्यान दिया गया और न ही निर्माण गुणवत्ता में सुधार किया गया।
एसडीओ बोले— “मामला दिखवाता हूं”
एनएच अथॉरिटी बिलासपुर के एसडीओ एआर पैगवार ने कहा कि निर्माणाधीन कंक्रीट सड़क पर इतनी जल्दी दरार पड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि सड़क 10 साल की मेंटेनेंस अवधि में रहेगी।
विशेषज्ञों ने बताए संभावित कारण
सिविल इंजीनियर भजराम पाटिल के अनुसार नई कंक्रीट सड़क पर इतनी जल्दी दरार पड़ना सामान्य नहीं है। इसके पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं—
क्योरिंग में लापरवाही: कंक्रीट डालने के बाद 14 से 21 दिन तक नियमित पानी देना जरूरी होता है। ऐसा नहीं होने पर कंक्रीट तेजी से सूखकर सिकुड़ती है और दरारें विकसित हो जाती हैं।
गलत मिश्रण अनुपात: सीमेंट, रेत और गिट्टी का अनुपात सही नहीं होने पर सड़क की मजबूती प्रभावित होती है।
सब-बेस की कमजोर कंपैक्शन: नीचे की सतह सही तरीके से दबाई नहीं गई हो तो सड़क जल्दी टूटने लगती है।
एक्सपेंशन जॉइंट की कमी: लंबी कंक्रीट सड़कों में तापमान के कारण फैलाव और सिकुड़न होती है। तकनीकी जॉइंट सही नहीं बनने पर बीच में क्रैक विकसित हो जाते हैं।





