पहले गरीबों पर चला बुलडोजर, रसूखदारों पर रुकी कार्रवाई: अब नजूल जमीन का हो रहा सीमांकन
सीमांकन से पहले तोड़फोड़ पर उठे सवाल, सड़क चौड़ीकरण कार्रवाई विवादों में

कवर्धा। शहर में चल रही 2.60 करोड़ रुपए की सड़क चौड़ीकरण परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि जिस जमीन पर सड़क चौड़ीकरण किया जाना है, उसकी नजूल भूमि और निजी संपत्ति की सीमा प्रशासन अब तक स्पष्ट नहीं कर पाया था। इसके बावजूद 28 अप्रैल से मकानों और दुकानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
अंबेडकर चौक से राजमहल चौक तक सड़क किनारे कई घरों और दुकानों के हिस्से तोड़े गए। किसी की दीवार टूटी तो किसी की दुकान और मकान का हिस्सा हटाया गया। कार्रवाई उस समय रुक गई जब प्रशासन निजी अस्पताल की बाउंड्रीवॉल तक पहुंचा और विरोध सामने आया। इसके बाद नगर पालिका ने तहसील कार्यालय को पत्र लिखकर नजूल भूमि का सीमांकन कराने की मांग की।
पहले कार्रवाई, अब सीमांकन
तहसीलदार कार्यालय द्वारा 5 मई को जारी पत्र में राजस्व निरीक्षक (नजूल) को प्रस्तावित स्थल का सीमांकन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि प्रशासन को पहले यह स्पष्ट नहीं था कि शासकीय जमीन कहां तक है और निजी संपत्ति कहां से शुरू होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना सीमांकन लोगों की संपत्तियों को किस आधार पर अतिक्रमण मानकर तोड़ा गया।
लोगों में नाराजगी
सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित मार्ग को 55 फीट तक चौड़ा किया जाना है। इस परियोजना पर करीब 2.60 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। लेकिन कार्रवाई से प्रभावित लोगों का आरोप है कि बिना स्पष्ट दस्तावेज और सीमांकन के ही उनके मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चला दिया गया। कई परिवारों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल
सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार पहले जमीन का सीमांकन, फिर अतिक्रमण की पहचान, नोटिस जारी करना और उसके बाद कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस मामले में पहले तोड़फोड़ हुई और अब सीमांकन कराया जा रहा है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों का पक्ष
नगर पालिका सीएमओ रोहित साहू ने कहा कि यह शहर का मुख्य मार्ग है, जो अतिक्रमण के कारण संकरा हो गया था। यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी, इसलिए अतिक्रमण हटाना जरूरी था।
वहीं नगर पालिका के सब इंजीनियर शिव गर्ग ने बताया कि सड़क को 55 फीट तक चौड़ा किया जाना है और जहां आवश्यकता पड़ रही है, वहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।




