बस्तर को वैश्विक बाजार से जोड़ेगा रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर, 4 घंटे में बंदरगाह तक सफर

कवर्धा बिलासपुर। ब्रजेश गुप्ता
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए बड़ी खुशखबरी है। रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130CD) के निर्माण से क्षेत्र को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार से सीधा जुड़ाव मिलेगा। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 464 किमी लंबा, लगभग 16,491 करोड़ रुपये की लागत वाला 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बस्तर के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।
यात्रा समय में भारी कमी
वर्तमान में जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक यात्रा में 7–9 घंटे लगते हैं, क्योंकि मार्ग ओडिशा के कठिन घाटों से होकर गुजरता है। नए कॉरिडोर के बनने के बाद यह दूरी मात्र 3.5 से 4 घंटे में तय की जा सकेगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
नबरंगपुर इंटरचेंज बनेगा मुख्य कनेक्शन
ओडिशा के नबरंगपुर में बनने वाला दासपुर इंटरचेंज बस्तर को इस कॉरिडोर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जगदलपुर से करीब 50–60 किमी की दूरी तय कर वाहन सीधे कॉरिडोर में प्रवेश कर सकेंगे।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार
कॉरिडोर के जरिए बस्तर के उत्पाद—जैसे अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और ढोकरा शिल्प—अब सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंच पाएंगे। इससे लॉजिस्टिक लागत घटेगी और उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत मिल सकेगी।
रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा
यह कॉरिडोर बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे जिलों में औद्योगिक विकास को गति देगा। लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और रियल एस्टेट में हजारों रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही लौह अयस्क जैसे खनिजों के निर्यात में भी तेजी आएगी।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
बेहतर कनेक्टिविटी से बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थल—चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफा और दंतेश्वरी मंदिर—तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण के साथ संतुलन
कांकेर जिले के केशकाल क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी राज्य की पहली ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है, जो उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरती है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास, ओवरपास और मंकी कैनोपी जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह परियोजना बस्तर को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में मजबूत कदम साबित होगी।
वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इसे कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बताया।
निष्कर्ष
रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर बस्तर के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि व्यापार, रोजगार, पर्यटन और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी खोलेगा—जिससे बस्तर को वैश्विक पहचान मिलने की राह और मजबूत होगी।


