31 धान खरीदी केंद्रों में 69,616 क्विंटल धान का रिकॉर्ड में उठाव बाकी, मौके पर नहीं मिला एक भी बोरा

कवर्धा। जिले के 31 धान खरीदी केंद्रों में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 69 हजार 616 क्विंटल धान का उठाव अभी भी लंबित दर्शाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। कई केंद्रों के निरीक्षण के दौरान फड़ पूरी तरह सूने मिले और कहीं भी धान का एक भी बोरा दिखाई नहीं दिया।
रविवार दोपहर विभिन्न शॉर्टेज वाले केंद्रों का निरीक्षण करने पर अधिकांश स्थानों पर चबूतरे खाली मिले। जहां पहले किसानों की भीड़, ट्रैक्टरों की कतारें और धान की बोरियों के ढेर दिखाई देते थे, वहां अब केवल धूल और बिखरे हुए बारदाने नजर आए। सरकारी रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल धान लंबित दर्शाए जाने के बावजूद केंद्रों में धान का कोई भौतिक स्टॉक नहीं मिला।
जिला प्रशासन की समीक्षा बैठक में 29 मई तक धान उठाव पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके बावजूद खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में उठाव लंबित बताया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र प्रभारियों को खरीदी गई पूरी मात्रा जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
10 केंद्रों में सबसे अधिक शॉर्टेज
मार्कफेड की 27 मई की रिपोर्ट के अनुसार 31 शॉर्टेज वाले केंद्रों में से 10 केंद्रों में सबसे अधिक धान की कमी दर्ज की गई है। इनमें कामठी में 4,067 क्विंटल, सूरजपुरा में 3,831 क्विंटल, पेंड्री कला में 2,674 क्विंटल, जुनवानी में 2,660 क्विंटल, रणवीरपुर में 2,647 क्विंटल, उसरवाही में 2,495 क्विंटल, कुरूवा में 2,484 क्विंटल, समनापुर (बम्हनी) में 2,386 क्विंटल, बोदा तरेगांव में 2,386 क्विंटल तथा धरमगढ़-समनापुर में 1,664 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई है।
2 प्रतिशत से अधिक कमी पर एफआईआर का प्रावधान
शासन के नियमों के अनुसार धान स्कंध में 2 प्रतिशत से अधिक कमी पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारी को तत्काल निलंबित कर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। करीब 70 हजार क्विंटल धान की कमी करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता का संकेत देती है। इसके बावजूद अब तक केवल 5 से 6 केंद्र प्रभारियों के खिलाफ जांच के बाद कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किए गए हैं। व्यापक स्तर पर कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है।
21.72 करोड़ रुपये तक का संभावित वित्तीय दायित्व
लगभग 70 हजार क्विंटल धान की कमी का आर्थिक मूल्यांकन करने पर बड़ा वित्तीय प्रभाव सामने आता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से धान की कीमत लगभग 16.10 करोड़ रुपये होती है। इसके अलावा कस्टम मिलिंग एवं परिवहन प्रोत्साहन मद में करीब 84 लाख रुपये, बारदाना, मजदूरी और प्रशासनिक व्यय पर लगभग 77 लाख रुपये तथा राज्य सरकार की अतिरिक्त इनपुट सब्सिडी के रूप में करीब 4.01 करोड़ रुपये का दायित्व जुड़ता है। इस प्रकार कुल संभावित राशि लगभग 21.72 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
खाद्य विभाग का पक्ष
जिला खाद्य अधिकारी चंद्रशेखर देवांगन ने बताया कि रिकॉर्ड के अनुसार 31 केंद्रों में धान का उठाव शेष है और सभी केंद्र प्रभारियों को खरीदी गई पूरी मात्रा जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि शासन को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। जिन मामलों में अनियमितताएं सामने आई हैं, उनमें जांच कर कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किए गए हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर रिकवरी और एफआईआर जैसी कार्रवाई भी की जाएगी।




