भूख-प्यास से जूझता गौर: देर से इलाज बना जान का खतरा”

कवर्धा lपंडरिया
पंडरिया वन क्षेत्र में पिछले एक महीने से घायल पड़े इंडियन बायसन (गौर) की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, यह गौर करीब 20 मार्च को क्षेत्र में पहुंचा था, जिसके सामने दाहिने पैर में तीर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। शुरुआती उपचार के बाद उसकी स्थिति कुछ समय के लिए स्थिर हुई, लेकिन अब हालत बेहद नाजुक हो गई है।
पिछले 4-5 दिनों से गौर एक ही जगह पर पड़ा हुआ है और अपने दोनों अगले पैरों पर खड़ा तक नहीं हो पा रहा है। लगातार बैठे रहने के कारण उसके एक पैर में अकड़न आ गई है, जिससे अब वह पूरी तरह उठने में असमर्थ हो गया है। हालत यह है कि वह पानी पीने और भोजन करने के लिए भी नहीं उठ पा रहा, जिससे उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घायल गौर का इलाज पखवाड़े भर तक सप्ताह में केवल एक दिन ही किया गया, जबकि शुरुआत से ही उसे शिफ्ट कर विशेष निगरानी में रखने और स्थायी कैंप बनाने की जरूरत थी। समय पर उचित देखभाल नहीं मिलने के कारण अब उसकी हालत करीब 60% तक कमजोर हो चुकी है।
वन विभाग ने गौर को शिफ्ट करने के लिए पहले ही उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा था, लेकिन डॉक्टरों ने स्थिति में सुधार का हवाला देकर इसे टाल दिया। अब जब हालत गंभीर हो गई है, तब पिछले 2-3 दिनों से तीन डॉक्टरों की नियमित ड्यूटी लगाई गई है।
फिलहाल वन विभाग द्वारा लकड़ी और पत्तों से अस्थायी छांव की व्यवस्था की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही बेहतर उपचार और निगरानी नहीं की गई, तो गौर की जान बचाना मुश्किल हो सकता है।





