कबीरधामकवर्धा

तेरस मेला विशेष दियाबार पर्वत की रहस्यमयी कथा के बीच छपरी गांव में होगा भोरमदेव तेरस महोत्सव

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी लोककथाओं में दियाबार पर्वत का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस पर्वत पर कभी नागराज वासुकी और नागिन का जोड़ा निवास करता था, जिन्हें पूरे भोरमदेव क्षेत्र का रक्षक माना जाता था।
इस वर्ष भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य के कारण तेरस पर होने वाला भोरमदेव महोत्सव मंदिर परिसर की बजाय छपरी गांव में आयोजित किया जाएगा। खास बात यह है कि छपरी गांव इसी रहस्यमयी दियाबार पर्वत के पास स्थित है। ऐसे में वर्षों से प्रचलित यह लोककथा एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
दियाबार पर्वत से जुड़ी लोकमान्यता
भोरमदेव पहुंचने से लगभग दो किलोमीटर पहले दाहिनी ओर स्थित पहाड़ी को दियाबार पर्वत कहा जाता है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, इसी पर्वत में फणिनाग वासुकी और नागिन का जोड़ा निवास करता था, जो पूरे क्षेत्र की रक्षा करता था।
कहते हैं कि मध्यरात्रि के समय नाग-नागिन अपनी नागमणि पर्वत पर रख देते थे, जिसकी दिव्य रोशनी से पूरा इलाका चमक उठता था। किंवदंती के अनुसार, उसी रोशनी में दोनों इच्छाधारी रूप धारण कर स्त्री-पुरुष के वेश में क्षेत्र में भ्रमण करते थे और भोर होने से पहले वापस पर्वत में लौट जाते थे। इस कथा के प्रति लोगों में गहरी आस्था है और इसी कारण तेरस मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कॉरिडोर निर्माण के कारण बदला आयोजन स्थल
इन दिनों भोरमदेव क्षेत्र में भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना का निर्माण कार्य जारी है। इसी वजह से इस वर्ष तेरस महोत्सव मंदिर परिसर में आयोजित नहीं हो पाएगा। आयोजन समिति ने कार्यक्रम के लिए छपरी गांव में मंच और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं।
छपरी गांव दियाबार पर्वत से सटा हुआ है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़ी नाग-नागिन की कथा एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में आ गई है। यह कथा पीढ़ियों से ग्रामीणों के बीच सुनाई जाती रही है।
रहस्यमयी घटना की भी सुनाई जाती है कहानी
ग्रामीणों के बीच एक और कहानी प्रचलित है। बताया जाता है कि एक बार किसी व्यक्ति ने आधी रात को नाग-नागिन और नागमणि की रोशनी का दृश्य देखने का दावा किया था। उसने सुबह गांव वालों को पूरी घटना बताई, लेकिन अगले ही दिन उसकी रहस्यमयी मौत हो गई।
इस घटना के बाद लोगों में इस स्थान के प्रति भय और श्रद्धा दोनों बढ़ गए। ग्रामीणों का मानना है कि सूर्यास्त के बाद इस क्षेत्र में अधिक देर तक रुकना ठीक नहीं होता।
भोरमदेव तेरस महोत्सव के छपरी गांव में आयोजन के साथ ही दियाबार पर्वत से जुड़ी यह प्राचीन लोककथा एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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