12 दिन में 7 मौतों का दावा, 50 से अधिक मलेरिया मरीज: वनांचल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

कवर्धा/चिल्फी घाटी। बोड़ला विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मुड़वाही समेत आठ से अधिक गांवों में अब तक 50 से ज्यादा मलेरिया मरीज सामने आए हैं। झलमला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 17 मरीज भर्ती हैं, जबकि गंभीर मरीजों को बोड़ला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। लगातार बढ़ते मामलों ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि पिछले 12 दिनों में मलेरिया और तेज बुखार के कारण दो महिलाओं, एक बच्चे सहित सात बैगा समुदाय के लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. देवेंद्र तूरे ने इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
हर दिन मिल रहे नए मरीज, गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम
मुड़वाही, सोनवाही, जामुनपानी, सरेंडा, समनापुर, बहनाखोदरा और बालसमुंद सहित कई गांवों में पिछले चार दिनों से प्रतिदिन 10 से 12 नए मरीज मिल रहे हैं। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष सर्वे दल तैनात किए हैं, जो घर-घर जाकर मलेरिया जांच, बुखार की स्क्रीनिंग और मरीजों को दवा उपलब्ध करा रहे हैं।
तीन वर्षों से नहीं बंटी मेडिकेटेड मच्छरदानी
मलेरिया की रोकथाम के लिए सबसे प्रभावी साधन मानी जाने वाली मेडिकेटेड मच्छरदानियां जिले के संवेदनशील गांवों में पिछले तीन वर्षों से वितरित नहीं की गई हैं। जिले में मलेरिया संवेदनशील गांवों की संख्या 219 से बढ़कर 230 हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार से 61,691 मेडिकेटेड मच्छरदानियों की मांग भेजी है, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।
2027 तक मलेरिया मुक्त प्रदेश का लक्ष्य, लेकिन जमीनी हकीकत चिंताजनक
राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन कबीरधाम के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों की स्थिति इस लक्ष्य के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच जिले में लगभग 300 मलेरिया मरीज मिल चुके हैं। वर्ष 2025 में 1,200, वर्ष 2024 में 1,377, वर्ष 2023 में 250, वर्ष 2022 में 236 तथा वर्ष 2021 में 850 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए थे।
एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं, एक बेड पर दो-दो मरीज
झलमला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जहां करीब 20 गांवों के लोग इलाज के लिए निर्भर हैं, वहां एक भी एमबीबीएस डॉक्टर पदस्थ नहीं है। अस्पताल का संचालन एक आरएमए और दो स्टाफ नर्सों के भरोसे हो रहा है। वहीं पदस्थ कई स्टाफ नर्स अन्य स्थानों पर अटैच होने के कारण अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। मरीजों की संख्या बढ़ने से 20 बिस्तरों वाले अस्पताल में कई जगह एक ही बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
सीएमएचओ डॉ. देवेंद्र तूरे के अनुसार जून 2026 से जिलेभर में विशेष मलेरिया सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 40 हजार से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। पिछले एक सप्ताह में झलमला और रेंगाखार क्षेत्र में 20 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। 15 से 20 सर्वे दल प्रभावित गांवों में लगातार जांच और उपचार का कार्य कर रहे हैं।
स्थिति स्पष्ट संकेत दे रही है कि वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण के लिए केवल सर्वे अभियान ही नहीं, बल्कि पर्याप्त डॉक्टरों की नियुक्ति, मेडिकेटेड मच्छरदानियों का तत्काल वितरण और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।




