कबीरधामकवर्धाछत्तीसगढ़

जिंदा बारूद से मिला पहला सुराग: कबीरधाम को नक्सल मुक्त बनाने की पूरी कहानी

कवर्धा  ब्रजेश गुप्ता
छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में कबीरधाम जिला एक अहम उदाहरण बनकर उभरा है। कभी नक्सल गतिविधियों के विस्तार की योजना का हिस्सा रहा यह क्षेत्र आज पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है। इस बदलाव की शुरुआत साल 2015 में मिले एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सुराग से हुई थी।
2015: जंगलों में मिला जिंदा बारूद, बढ़ा खतरे का अंदेशा
सितंबर 2015 में पुलिस को पहली बार जंगलों में जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए जिंदा बारूद मिले। यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी साबित हुई कि नक्सली इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं।
इस इनपुट के बाद केंद्र और राज्य स्तर पर अलर्ट जारी किया गया। रेंगाखार थाना क्षेत्र के कोक्लान झोरी और कुंडपानी में पुलिस कैंप स्थापित किए गए। वहीं चिल्की थाना क्षेत्र के शंभूपीपर में अस्थायी कैंप बनाकर करीब 1500 जवानों की तैनाती की गई।
2016: बड़े नक्सली प्लान का खुलासा
2016 में छुईखदान के जंगलों से मिले दस्तावेजों ने बड़ा खुलासा किया। इसमें माओवादियों की योजना सामने आई कि महाराष्ट्र–मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ (एमएमसी) बॉर्डर क्षेत्र को नया गुरिल्ला जोन बनाया जाए।
इस रणनीति में कबीरधाम को अहम केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना थी। इसके तहत 58 नक्सलियों की टुकड़ी भेजी गई, जिसे बाद में बढ़ाकर 100 तक किया गया।
2017: हथियार बरामद, बढ़ाई गई सुरक्षा
2017 में समनापुर के जंगलों में नक्सलियों द्वारा छिपाए गए हथियार बरामद हुए। इसके बाद झलमला और सिंघनपुरी में स्थायी पुलिस कैंप स्थापित किए गए।
हालांकि, तरेगांव क्षेत्र में शुरुआती लापरवाही के कारण नक्सलियों ने अपनी पैठ बना ली थी, जिसे बाद में ऑपरेशन के जरिए नियंत्रित किया गया।
2018: बकोदा मुठभेड़ बना टर्निंग पॉइंट
14 मार्च 2018 को भोरमदेव अभयारण्य के बकोदा गांव के पास सुरक्षा बलों ने बड़ा एंटी-नक्सल ऑपरेशन चलाया।
करीब आधा किलोमीटर क्षेत्र में फैले नक्सली कैंप को जवानों ने रणनीतिक तरीके से घेर लिया। लगभग 45 मिनट तक चली मुठभेड़ में करीब 65 नक्सली मौजूद थे, जिनमें एमएमसी जोन का कमांडर दीपक तेलतुमड़े भी शामिल था।
इस ऑपरेशन की खास बात यह रही कि एक भी जवान हताहत नहीं हुआ।
लगातार ऑपरेशन से टूटी नक्सलियों की कमर
केंद्र द्वारा कबीरधाम को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में शामिल करने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार ऑपरेशन, बेहतर इंटेलिजेंस और कैंप स्थापना के जरिए जवाब दिया।
धीरे-धीरे नक्सलियों की बड़ी टुकड़ियां बिखर गईं और उनकी संख्या घटकर छोटे प्लाटून तक सीमित रह गई।
आज की स्थिति: कबीरधाम नक्सल मुक्त
सुरक्षा रणनीति, कैंप स्थापना और पुनर्वास नीति के चलते कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया। पहले जहां 9 पुलिस कैंप थे, अब 8 सक्रिय कैंपों के साथ क्षेत्र पूरी तरह नियंत्रण में है।
कबीरधाम जिले के 324 गांव अब नक्सल मुक्त घोषित किए जा चुके हैं, जो सुरक्षा बलों की दीर्घकालिक रणनीति और सतत प्रयासों का परिणाम है।
निष्कर्ष
कबीरधाम की यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक छोटे सुराग—जंगल में मिले जिंदा बारूद—ने पूरे सुरक्षा तंत्र को सक्रिय किया और समय रहते कार्रवाई कर एक बड़े खतरे को टाल दिया गया। लगातार ऑपरेशन, सटीक इंटेलिजेंस और स्थानीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति ने इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से पूरी तरह मुक्त कर दिया।

Advertisement Advertisement 2

Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button