कबीरधामकवर्धा

सूखाताल–खड़ौदा सिंचाई नहर में निर्माण गड़बड़ी, 200 मीटर हिस्सा तोड़कर फिर से होगा निर्माण

कवर्धा/बोड़ला। ग्राम सूखाताल से खड़ौदा तक बन रही लगभग 3 किलोमीटर लंबी सिंचाई नहर में निर्माण कार्य में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। करीब 2.78 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस नहर में निर्माण पूरा होने से पहले ही कई स्थानों पर दरारें पड़ गईं। मामले के सामने आने के बाद जल संसाधन विभाग ने कार्रवाई करते हुए नहर के लगभग 200 मीटर हिस्से को जेसीबी से तोड़कर दोबारा निर्माण शुरू कराया है।
स्थल निरीक्षण में पाया गया कि नहर निर्माण के दौरान कई तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार, खुदाई के बाद नहर में भरी जाने वाली मुरूम की उचित कुटाई (कम्पेक्शन) नहीं की गई, जिसके कारण ऊपर डाले गए कंक्रीट का भार पड़ते ही मिट्टी बैठ गई और कंक्रीट में दरारें उभरने लगीं।
सिविल इंजीनियर भजराम पाटिल के अनुसार, नहर निर्माण की मानक प्रक्रिया में पहले मुरूम भरकर उसे समतल कर अच्छी तरह दबाया जाता है। इसके बाद पॉलिथीन लेयर बिछाकर कंक्रीट डाला जाता है। लेकिन यहां यह प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई नहीं गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हुई।
खेतों तक पानी पहुंचाने में आ सकती है दिक्कत
स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि नहर और खेतों की लेवलिंग पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इससे कई स्थानों पर खेतों तक पानी पहुंचाने में किसानों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।
डेढ़ किलोमीटर हिस्से में अब भी दिखाई दे रही दरारें
किसानों के अनुसार नहर के करीब एक से डेढ़ किलोमीटर हिस्से में अभी भी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। कई जगह ठेकेदार द्वारा दरारों में मसाला भरकर उन्हें बंद करने का प्रयास किया गया है। किसानों का कहना है कि जब नहर में पूरी क्षमता से पानी छोड़ा जाएगा, तो यह अस्थायी मरम्मत टिक नहीं पाएगी और नहर कुछ वर्षों में धंसने की आशंका है।
कंक्रीट मिक्सिंग और क्योरिंग में भी मिली गड़बड़ी
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कंक्रीट तैयार करते समय गिट्टी की मात्रा अधिक और सीमेंट-रेत का अनुपात कम रखा गया, जिससे कंक्रीट की मजबूती प्रभावित हुई। इसके अलावा निर्माण के बाद आवश्यक पानी की तराई (क्योरिंग) भी पर्याप्त नहीं की गई। इसके कारण कंक्रीट की सतह पर धूल उड़ने लगी और दरारें बढ़ती गईं।
गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई: एसडीओ
जल संसाधन उपसंभाग बोड़ला के एसडीओ विनय केशरवानी ने बताया कि नहर निर्माण का ठेका नरेश यादव को दिया गया है और टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से हुई थी। उन्होंने कहा कि होली के दौरान कार्य कराया गया था, उस समय विभागीय अवकाश के कारण अधिकारियों की निगरानी सीमित रही।
उन्होंने बताया कि जहां भी निर्माण में गड़बड़ी पाई गई है, वहां नहर का हिस्सा तुड़वाकर नए सिरे से निर्माण कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसानों को सिंचाई में कोई समस्या न हो।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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