धान उपार्जन केंद्रों में अव्यवस्था: खरीदी खत्म होते ही फैल रही गंदगी, ग्रामीणों में नाराजगी

कवर्धा
कुंडा क्षेत्र में किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए धान उपार्जन केंद्र अब अव्यवस्था और लापरवाही की तस्वीर पेश कर रहे हैं। क्षेत्र के लगभग 11 उपार्जन केंद्रों में धान उठाव का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बाद इन केंद्रों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जगह-जगह प्लास्टिक की बोरियां, भूसी और अन्य कचरे के ढेर साफ-सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
धान खरीदी खत्म होने के बाद इन केंद्रों का हाल किसी मेले के बाद छोड़े गए मैदान जैसा दिखाई देता है। पन्नी, झिल्ली, कागज और अधूरी भरी बोरियां खुले में बिखरी पड़ी हैं। बारिश के मौसम में यही कचरा सड़कर बदबू फैलाता है और मच्छरों के पनपने का कारण बनता है, जिससे आसपास के ग्रामीणों में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सबसे गंभीर समस्या यह है कि कई केंद्रों में बाउंड्रीवाल नहीं होने के कारण मवेशियों का बेरोकटोक आना-जाना लगा रहता है। मवेशी भूसी के साथ प्लास्टिक भी निगल लेते हैं, जिससे उनकी जान पर खतरा मंडराता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल देखने को मिलती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और सोसायटी प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं देते। स्थायी मंडियों की तरह यहां न तो नियमित सफाई की व्यवस्था है और न ही पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। शासन द्वारा साफ-सफाई और रखरखाव के लिए राशि जारी की जाती है, लेकिन उसका उपयोग जमीनी स्तर पर नजर नहीं आता।
स्थानीय लोगों ने सोसायटी प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले सोसायटियों में किसानों द्वारा चुने गए अध्यक्ष होते थे, जो समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि मजदूरों की कमी के कारण सफाई कार्य प्रभावित हो रहा है, हालांकि जल्द ही सफाई कराने का आश्वासन दिया गया है।
किसानों और ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि सोसायटियों में पुनः चुनाव प्रक्रिया लागू की जाए, ताकि जिम्मेदार प्रतिनिधि चुने जा सकें। साथ ही सभी उपार्जन केंद्रों में बाउंड्रीवाल निर्माण और नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो यह लापरवाही भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और पशुहानि का कारण बन सकती




