छत्तीसगढ़ में 27 सितंबर तक बारिश का दौर, किसानों की बढ़ी चिंता
कवर्धा समेत मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में तेज बारिश के आसार; धान को सामान्य बारिश से फायदा, लेकिन खड़ी सोयाबीन, मक्का और दलहन में नुकसान का खतरा

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन का असर छत्तीसगढ़ में दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 25 सितंबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, जबकि कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 26 सितंबर को भी कई जगह बारिश जारी रहने तथा एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। �
मौसम का यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर होने की स्थिति में है, लेकिन इसके प्रभाव से 25 से 27 सितंबर तक अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जैसे दक्षिणी जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना बताई गई है, जबकि दुर्ग और रायपुर संभाग के कई हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। �
कवर्धा में 26 सितंबर तक विशेष नजर
कबीरधाम सहित मध्य छत्तीसगढ़ में किसानों को अगले 24–48 घंटे मौसम पर नजर रखने की जरूरत है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है।
कौन-सी फसल को फायदा?
धान: जिन खेतों में धान की फसल अभी बढ़वार या दाना भरने की अवस्था में है, वहां सामान्य और नियंत्रित बारिश से फायदा हो सकता है। खेत में पर्याप्त नमी बनी रहने से सिंचाई की जरूरत कम होगी।
मक्का: पर्याप्त नमी मक्का के लिए उपयोगी है, लेकिन खेत में पानी जमा होने पर फायदा नुकसान में बदल सकता है।
सोयाबीन: बारिश की जरूरत वाली अवस्था में नमी लाभदायक हो सकती है, लेकिन पकने की अवस्था में लगातार बारिश से फली में नमी बढ़ने, दाना खराब होने और फली झड़ने का खतरा रहता है।
इन फसलों में नुकसान का खतरा
सोयाबीन: इस समय कई क्षेत्रों में सोयाबीन पकने की अवस्था में है। लगातार बारिश होने पर फली में अंकुरण, दाना खराब होने और फसल झड़ने की समस्या हो सकती है।
मक्का: तेज हवा और बारिश से खड़ी मक्का की फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा रहता है।
दलहन: उड़द, मूंग और अरहर जैसी फसलों में खेत में पानी भरने से जड़ों को नुकसान और फफूंदजनित रोग बढ़ सकते हैं।
सब्जियां: टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी समेत सब्जी फसलों में लगातार नमी से गलन और फफूंद रोग बढ़ने की आशंका रहती है।
किसानों के लिए जरूरी सावधानी
खेत में पानी जमा होने पर निकासी की व्यवस्था करें।
पकने की अवस्था में पहुंच चुकी फसल की जल्द कटाई और सुरक्षित भंडारण पर विचार करें।
कटी हुई फसल को खुले खेत में ज्यादा समय तक न छोड़ें।
बारिश के दौरान खेत में कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव न करें।
बिजली और तेज हवा के दौरान खेतों में जाने से बचें।
सोयाबीन, मक्का और दलहन की फसल वाले किसान विशेष रूप से मौसम पर नजर रखें





