50 से अधिक स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे, छात्रावासों में अब भी जमे 29 संलग्न शिक्षक
नियमित अधीक्षक की पदस्थापना के बाद भी कई शिक्षक मूल स्कूलों में नहीं लौटे, बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

कवर्धा। राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को समाप्त करने के निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कबीरधाम जिले में यह व्यवस्था पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। आदिम जाति कल्याण विभाग के आश्रम-छात्रावासों में शिक्षा विभाग के 29 शिक्षक अब भी अधीक्षक एवं अधीक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ रहा है, जहां 50 से अधिक स्कूल एकल शिक्षकीय व्यवस्था में संचालित हो रहे हैं।
जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के कुल 104 आश्रम-छात्रावास संचालित हैं। इनमें 29 छात्रावासों में नियमित अधीक्षक नहीं होने के कारण शिक्षा विभाग से शिक्षकों की सेवाएं ली गई हैं। हालांकि कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां नियमित अधीक्षक की नियुक्ति होने के बाद भी संलग्न शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में वापस नहीं भेजा गया है।
वीएसके ऐप में उपस्थिति को लेकर भी सवाल
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए वीएसके ऐप के माध्यम से स्कूल में प्रतिदिन चेक-इन और चेक-आउट अनिवार्य किया है। लेकिन छात्रावासों में संलग्न शिक्षकों की उपस्थिति इस ऐप में दर्ज नहीं हो रही है। ऐसे में उनकी उपस्थिति का सत्यापन कौन कर रहा है और वेतन प्रक्रिया कैसे होगी, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
दूसरे ब्लॉक में संलग्नीकरण से बढ़ी शिक्षकों की कमी
जानकारों का कहना है कि यदि किसी छात्रावास में अस्थायी आवश्यकता हो तो निकटवर्ती विद्यालय से शिक्षक की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके विपरीत जिले में एक ब्लॉक के शिक्षक को दूसरे ब्लॉक के छात्रावास में संलग्न किया गया है। उदाहरण के तौर पर बोड़ला ब्लॉक के एक शिक्षक को पंडरिया ब्लॉक के विशेष पिछड़ी जनजाति छात्रावास पोलमी में संलग्न किया गया है, जिससे संबंधित स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बढ़ गई है।
एक शिक्षिका के संलग्न होने से स्कूल हुआ एकल शिक्षकीय
आदिवासी बाहुल्य ग्राम रूख्मीदादर स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय नवापारा इसका उदाहरण है। यहां की प्रधान पाठक ममता धुर्वे पिछले लगभग दो वर्षों से विशेष पिछड़ी जनजाति छात्रावास पोलमी में संलग्न हैं। उनके छात्रावास में कार्यरत रहने के कारण विद्यालय में केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित हो रही है।
नियमित अधीक्षिका की नियुक्ति के बाद भी संलग्नीकरण जारी
ग्राम नेउर स्थित आदिवासी कन्या आश्रम में दिसंबर 2025 से आदिम जाति कल्याण विभाग की नेहा गुप्ता नियमित अधीक्षिका के रूप में कार्यभार संभाल चुकी हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की बसंती बंजारे अब भी वहीं संलग्न हैं। ऐसे मामलों में नियमित अधीक्षक उपलब्ध होने के बाद भी अतिरिक्त संलग्नीकरण समाप्त नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों का पक्ष
आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त लक्ष्मीचंद पटेल ने बताया कि 29 छात्रावासों में नियमित अधीक्षक नहीं होने के कारण शिक्षा विभाग से शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि वीएसके ऐप में उपस्थिति दर्ज नहीं होने से वेतन संबंधी समस्या आ सकती है और इसका समाधान तलाशा जा रहा है।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने कहा कि सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रस्ताव पर कलेक्टर के आदेश से शिक्षकों को छात्रावासों में संलग्न किया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के समायोजन के बाद एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या कम हुई है, लेकिन कुछ स्थानों पर संलग्नीकरण के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता।




