चार नए कॉलेज खोलने की तैयारी, पुराने कॉलेजों में प्राचार्य तक नहीं
पीजी कॉलेज कवर्धा में 62 स्वीकृत पदों में से 44 रिक्त, तीन कॉलेजों के पास अपना भवन नहीं; छत्तीसगढ़ बनने के बाद नियमित सहायक प्राध्यापकों की केवल तीन बार हुई भर्ती

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कबीरधाम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का विस्तार करने के लिए मरका, रबेली, बीरेंद्र नगर और चिल्फी घाटी में चार नए शासकीय कॉलेज खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर अगले शिक्षा सत्र से यहां पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर जाने से राहत मिल सकती है। लेकिन दूसरी ओर जिले के पुराने कॉलेजों में प्राचार्यों और प्राध्यापकों की कमी के साथ भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी चुनौती बना हुआ है।
जिले के सबसे बड़े शासकीय पीजी कॉलेज कवर्धा में स्वीकृत 62 पदों में से 44 रिक्त बताए गए हैं। यहां केवल 18 नियमित प्राध्यापक कार्यरत हैं। कॉलेज में पूर्णकालिक प्राचार्य के स्थान पर प्रभारी प्राचार्य व्यवस्था संभाल रहे हैं। उन्हें कुंडा कॉलेज का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। ऐसे में नए कॉलेज खोलने की योजना के बीच पुराने संस्थानों में शैक्षणिक व्यवस्था सुधारने की जरूरत भी सामने आ रही है।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद तीन बार ही हुई नियमित भर्ती
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राकेश चंदेल ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद नियमित सहायक प्राध्यापकों की भर्ती अब तक केवल तीन बार हुई है। नियमित भर्ती की सीमित प्रक्रिया के कारण उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है। रिक्त पदों को भरने के लिए नियमित भर्ती और विषयवार प्राध्यापकों की पदस्थापना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अतिथि प्राध्यापकों के भरोसे कई कॉलेज
जिले के सहसपुर लोहारा, बोड़ला, पिपरिया, पंडरिया, पांडातराई, झलमला, कुंडा और कन्या महाविद्यालय कवर्धा सहित विभिन्न कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की कमी बताई गई है। कई जगह अतिथि प्राध्यापकों और जनभागीदारी मद से नियुक्त शिक्षकों के सहारे कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
वहीं, झलमला, कुकदूर और कुंडा के कॉलेजों के पास स्वयं का भवन नहीं है। ये संस्थान अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में नए कॉलेज शुरू करने के साथ पर्याप्त कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेगी राहत
मरका, रबेली, बीरेंद्र नगर और चिल्फी घाटी में कॉलेज खुलने से आसपास के ग्रामीण विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। इससे आवागमन का समय और खर्च कम होने की उम्मीद है। खासकर उन विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है, जिन्हें दूरी और आर्थिक कारणों से 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई जारी रखने में परेशानी होती है।
क्या कहती हैं प्रभारी प्राचार्य?
पीजी कॉलेज कवर्धा की प्रभारी प्राचार्य डॉ. ऋचा मिश्रा के अनुसार, चारों स्थानों पर नए कॉलेज खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। नए कॉलेजों के संबंध में अभिमत देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले शिक्षा सत्र से इन स्थानों पर पढ़ाई शुरू हो सकेगी। उन्होंने बताया कि नियमित प्राध्यापकों की भर्ती राज्य स्तर पर होती है और रिक्त पदों की जानकारी समय-समय पर शासन को भेजी जाती है।
अब सवाल यह है कि नए कॉलेजों को मंजूरी मिलने के साथ क्या पुराने कॉलेजों के रिक्त पदों को भरने, नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति और भवनों की कमी दूर करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे? ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का अवसर देने के लिए कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के साथ उनमें पर्याप्त शिक्षक और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।



