तिमाही परीक्षा के प्रश्नपत्रों में त्रुटियों पर भड़का संयुक्त शिक्षक संघ, डीईओ की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

कवर्धा। तिमाही परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण शैक्षणिक व्यवस्था में प्रश्नपत्रों की त्रुटियों और कक्षा 1 से 8 तक के प्रश्नपत्रों की सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराने के मामले को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था में ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी में डालती है।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर के 30 जुलाई 2026 के निर्देश के अनुसार 21 सितंबर से तिमाही परीक्षा आयोजित की जानी थी। कक्षा 1 से 12 तक प्रश्नपत्रों की छपाई कर विकासखंड से संकुलों तक पहुंचाने की व्यवस्था निर्धारित होने के बावजूद कक्षा 1 से 8 तक के प्रश्नपत्र सॉफ्ट कॉपी में भेजे गए। इतना ही नहीं, कुछ प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियां भी सामने आईं।
बजट का अभाव बताकर जिम्मेदारी से बचने का आरोप
प्रश्नपत्रों की छपाई को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बजट के अभाव का हवाला दिए जाने पर संघ ने असंतोष जताया। संघ का कहना है कि यदि परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं था तो समय रहते उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। परीक्षा शुरू होने के बाद अव्यवस्था सामने आना विभागीय तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
संघ ने मांग की कि कक्षा 1 से 8 तक के प्रश्नपत्र भविष्य में सॉफ्ट कॉपी के बजाय समय पर मुद्रित और त्रुटिरहित रूप में उपलब्ध कराए जाएं। संघ ने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच की जिम्मेदारी वाले अधिकारियों को लापरवाही के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
परीक्षा में गलती, जिम्मेदारी तय करने के बजाय आश्वासन
संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में बार-बार त्रुटियां सामने आना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की गंभीर कमी को दर्शाता है। केवल आगामी परीक्षाओं में सावधानी बरतने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। संघ ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए और लापरवाही पर कार्रवाई होनी चाहिए।
शिक्षकों के वेतन और एकल शिक्षक स्कूल का मुद्दा भी उठाया
बैठक में अवकाश पर रहने वाले शिक्षकों का वेतन नहीं रोकने का मुद्दा भी उठाया गया। डीईओ ने अवकाशधारी शिक्षकों की जानकारी मंगाए जाने और वेतन नहीं रोकने की बात कही।
वहीं प्राथमिक शाला बोराइकछार में शिक्षक के स्थानांतरण के बाद बनी एकल शिक्षक की स्थिति की जानकारी भी अधिकारियों को दी गई। इस पर तत्काल शिक्षा दूत की पदस्थापना का आश्वासन दिया गया। उच्च परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों के आवेदन संबंधी प्रस्ताव जेडी कार्यालय भेजने पर भी चर्चा हुई।
संघ ने कहा—शिक्षा व्यवस्था को प्रयोगशाला न बनाएं
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से है। ऐसे में प्रश्नपत्रों में त्रुटि, समय पर प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं होना और बजट के अभाव का हवाला देकर व्यवस्था को टालना गंभीर विषय है। संघ ने विभाग से मांग की कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तय अधिकारियों की निगरानी में सुनिश्चित की जाए।
बैठक में संभाग अध्यक्ष एवं प्रभारी विनोद गुप्ता, जिलाध्यक्ष धनुक वर्मा, संभाग उपाध्यक्ष मार्कण्डेय साहू, महासचिव के.डी. वैष्णव, ब्लॉक अध्यक्ष महेश पाली सहित गणेश पटेल, राजू मेश्राम, कामता चन्द्रवंशी, लतीफ कुरैशी, मुरली झारिया, दिनेश चन्द्रवंशी, छोटे लाल पाटिल, गिरधर वर्मा, संतोष निषाद, अर्जुन लहरे, जिनेंद्र रत्नाकर, नितेन्द्र गजपाल, सुरेश वर्मा, टेकराम डड़सेना सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।





