पहली ही बारिश में 2.50 करोड़ की सड़क की खुली पोल: 60 टन का हाईवा धंसा, ग्रामीणों ने हाथ से उखाड़ दी डामर की परत

कवर्धा/बोड़ला/ ब्रजेश गुप्ता
ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई करीब 2.50 करोड़ रुपए की सड़क पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई। दलदली मेन रोड से खरिया-अगरी (बी) तक बनी 3.60 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के महज तीन महीने बाद ही क्षतिग्रस्त होने लगी। बुधवार को पुलिया के पास निर्माण सामग्री से भरे करीब 60 टन वजन वाले हाईवा का पहिया सड़क में धंस गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने मौके पर सड़क की डामर परत हाथ से उखाड़कर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और मामला राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सड़क की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह गुरुवार को अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच के बाद दो इंजीनियरों को निलंबित कर कार्यपालन अभियंता (ईई) के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
पुलिया के पास धंसी सड़क, 50 मीटर तक दिखीं दरारें
ग्रामीणों के मुताबिक हाईवा के पुलिया के पास पहुंचते ही सड़क धंस गई। इसके बाद लोगों ने सड़क की परत की जांच की तो कई जगह डामर हाथ से ही उखड़ने लगी। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का बेस निर्धारित मानकों के अनुरूप मजबूत नहीं बनाया गया। घटनास्थल के आसपास करीब 50 मीटर तक सड़क पर लंबी दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।
निर्धारित समय से देरी, फिर भी गुणवत्ता पर सवाल
सूचना बोर्ड के अनुसार सड़क निर्माण कार्य दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था और इसे 12 महीने में पूरा किया जाना था। हालांकि सड़क मार्च 2026 में बनकर तैयार हुई। ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित समय से देरी के बावजूद निर्माण एजेंसी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में विफल रही।
दो दिन में जांच रिपोर्ट, उसके बाद होगी कार्रवाई
विभागीय अधिकारियों के अनुसार सड़क का निर्माण ठेकेदार तिलक चंद्रवंशी द्वारा कराया गया है। सीजीआरआरडीए के सचिव एवं सीईओ भीम सिंह दो सदस्यीय तकनीकी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की। विभाग का कहना है कि दो दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, तीन स्तर पर जिम्मेदारी तय होने की संभावना
मामले में निर्माण एजेंसी, गुणवत्ता परीक्षण करने वाले इंजीनियर तथा परियोजना के सुपरविजन की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि सड़क के बेस में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया और गुणवत्ता परीक्षण में लापरवाही बरती गई।
विशेषज्ञ की राय
सिविल इंजीनियर भजराम पाटिल के अनुसार पुलिया के पास सड़क का बेस अधिक मजबूत होना चाहिए था। यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप ग्रेन्युलर सब-बेस (जीएसबी) के स्थान पर सामान्य मुरुम का उपयोग किया गया है, तो बारिश के दौरान जमीन बैठने से सड़क धंस सकती है। हालांकि वास्तविक कारण तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
ईई बोले- सड़क 10 से 12 टन क्षमता की, 60 टन का हाईवा चढ़ गया
पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता एसके राजपूत ने कहा कि संबंधित सड़क की डिजाइन क्षमता 10 से 12 टन तक के वाहनों के लिए है। जिस हाईवा का पहिया धंसा, उसमें करीब 60 टन भार था। बारिश के कारण साइड शोल्डर नरम हो गया था, जिससे सड़क का हिस्सा धंस गया। उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में केवल वही स्थान दिखाया जा रहा है, जहां हाईवा धंसा था, पूरे मार्ग को घटिया कहना उचित नहीं होगा। हालांकि मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है



