नया बस स्टैंड: यातायात सुधरा या यात्रियों की सुरक्षा दांव पर?
किमी दूरी ने बढ़ाई ऑटो पर निर्भरता, शाम होते ही सुरक्षा को लेकर सवाल; शराब दुकान के आसपास जमावड़े और नशे में वाहन चलाने की शिकायतों से व्यवस्था कठघरे में

कवर्धा। शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के नाम पर पुराने बस स्टैंड को जुनवानी रोड स्थित नए हाईटेक बस स्टैंड में शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन का उद्देश्य शहर के बीच बढ़ते यातायात दबाव को कम करना था, लेकिन नए बस स्टैंड के संचालन के बाद अब यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुराने बस स्टैंड से करीब 2 किलोमीटर दूर बनाए गए नए बस स्टैंड तक पहुंचना और वहां से शहर लौटना यात्रियों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन गया है। बस से उतरने के बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को ऑटो-रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी शाम और देर रात आने-जाने वाले यात्रियों, खासकर महिलाओं और अकेले सफर करने वालों को हो रही है।
शाम ढलते ही सुरक्षा का सवाल
दिन में नया बस स्टैंड भले ही सामान्य नजर आए, लेकिन शाम ढलने के बाद यहां की स्थिति को लेकर यात्रियों की चिंता बढ़ जाती है। यात्रियों का कहना है कि रात के समय बस स्टैंड और आसपास का क्षेत्र अपेक्षाकृत सुनसान हो जाता है।
बस स्टैंड के आसपास शराब दुकान होने के कारण यहां असामाजिक तत्वों के जमावड़े की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे माहौल में देर शाम बस से उतरने वाली महिलाओं, युवतियों और अकेले यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे सुरक्षित तरीके से अपने घर तक कैसे पहुंचें?
यह केवल सुविधा का नहीं, सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा का सवाल है।
ऑटो में बैठने से पहले यात्री सोचने को मजबूर
नए बस स्टैंड के कारण ऑटो यात्रियों के लिए जरूरी साधन बन गया है। लेकिन यात्रियों की ओर से कुछ ऑटो चालकों के नशे की हालत में वाहन चलाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
यदि यह शिकायतें सही हैं तो स्थिति और गंभीर है। बस से उतरने के बाद मजबूरी में ऑटो लेने वाला यात्री चालक की स्थिति की जांच नहीं कर सकता। ऐसे में नशे में वाहन चलाने वाला एक चालक सिर्फ यातायात नियम नहीं तोड़ता, बल्कि उसके वाहन में बैठे यात्रियों की जान भी जोखिम में डालता है।
यातायात विभाग के महेश्वर सिंह ने बताया कि विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता है। उनके अनुसार एक महीने के भीतर धारा 185 के तहत 9 लोगों पर कार्रवाई की गई है।
हालांकि सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल आंकड़ों तक सीमित रहेगी या नए बस स्टैंड क्षेत्र में शाम से देर रात तक नियमित और दिखाई देने वाली जांच व्यवस्था भी बनाई जाएगी?
दूरी बढ़ी तो ऑटो किराए की मनमानी का भी आरोप
नए बस स्टैंड की शहर से दूरी ने यात्रियों की ऑटो पर निर्भरता बढ़ा दी है। इसी के साथ मनमाने किराए की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
बस से उतरने के बाद यात्री के पास सीमित विकल्प होते हैं। उसे शहर जाना ही है और ऐसे में यदि किराया पहले से निर्धारित नहीं है तो मोलभाव की स्थिति पैदा होती है।
यात्रियों की मांग है कि नए बस स्टैंड से शहर के प्रमुख क्षेत्रों के लिए निश्चित ऑटो किराया तय किया जाए और उसकी सूची बस स्टैंड परिसर में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा प्रीपेड ऑटो सुविधा शुरू करना भी प्रभावी विकल्प हो सकता है।
हाईटेक भवन काफी नहीं, सुरक्षा व्यवस्था भी हाईटेक चाहिए
सिर्फ आधुनिक भवन बना देने से कोई बस स्टैंड यात्री सुविधाओं की कसौटी पर सफल नहीं हो जाता। असली परीक्षा तब होती है जब रात में कोई महिला यात्री बस से उतरती है और उसे अकेले शहर तक जाना पड़ता है।
नए बस स्टैंड में पर्याप्त रोशनी, सक्रिय सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा गार्ड, महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित प्रतीक्षालय, पुलिस हेल्प डेस्क और नियमित पुलिस पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाएं मजबूत किए जाने की जरूरत है।
खासकर बस स्टैंड से शहर तक आने वाले मार्ग पर भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। क्योंकि सुरक्षा केवल बस स्टैंड की चारदीवारी तक सीमित नहीं हो सकती।
यात्रियों की मांग — अब सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीन पर व्यवस्था चाहिए
• शाम के बाद पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए
• नए बस स्टैंड क्षेत्र में नियमित वाहन जांच हो
• नशे में वाहन चलाने वाले ऑटो चालकों पर सख्त कार्रवाई हो
• शहर और बस स्टैंड के बीच ऑटो का निश्चित किराया लागू हो
• प्रीपेड/निर्धारित दर वाली ऑटो सेवा शुरू की जाए
• बस स्टैंड और पहुंच मार्ग पर पर्याप्त रोशनी हो
• सीसीटीवी कैमरों की निगरानी प्रभावी बनाई जाए
• महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित प्रतीक्षालय और हेल्प डेस्क हो
• शराब दुकान के आसपास असामाजिक गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाए
सबसे बड़ा सवाल: यातायात सुधरने की कीमत यात्री सुरक्षा तो नहीं?
पुराने बस स्टैंड को हटाकर नया बस स्टैंड शुरू करना यातायात व्यवस्था सुधारने की दिशा में प्रशासनिक निर्णय हो सकता है। लेकिन शहर से दूरी बढ़ाने के साथ प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ती है।
यदि यात्रियों को बस से उतरने के बाद सुरक्षित परिवहन नहीं मिलता, महिलाओं को देर शाम ऑटो लेने में डर लगता है, नशे में वाहन चलाने की शिकायतें सामने आती हैं और किराए को लेकर मनमानी होती है, तो केवल नए भवन को हाईटेक कह देना पर्याप्त नहीं है।
अब जरूरत नगर पालिका, पुलिस, यातायात विभाग और प्रशासन के बीच समन्वित व्यवस्था बनाने की है।
क्योंकि सवाल सिर्फ बस स्टैंड का नहीं है। सवाल उन यात्रियों का है जो रात में बस से उतरकर घर जाने के लिए सड़क पर निकलते हैं।
यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए बस स्टैंड शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन अब यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि शहर से दूर किया गया बस स्टैंड यात्रियों को सुरक्षा से भी दूर न कर दे।





