121 पेशियां, फिर भी नहीं मिली गौ-अभयारण्य की जमीन
2 माह में 100 से ज्यादा मवेशियों की मौत, हादसों में 2 लोगों की जान गई; 175 एकड़ में बनना है गौ-अभयारण्य

सी जी एन न्यूज़ | कवर्धा
गौ-माता के संरक्षण और संवर्धन का दावा करने वाली सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट कबीरधाम जिले में अफसरशाही और लचर राजस्व व्यवस्था के बीच अटका हुआ है। जिले के जैतपुरी, सरेखा और पचराही में करीब 175 एकड़ जमीन पर गौ-अभयारण्य और गौधाम बनाया जाना है, लेकिन परियोजना घोषित होने के वर्षों बाद भी पशु चिकित्सा सेवा विभाग को जमीन का औपचारिक आवंटन नहीं हो सका है।
हैरानी की बात यह है कि जमीन आवंटन के लिए विभाग खुद आवेदक बनकर तहसील कार्यालयों में तारीखों के चक्कर काट रहा है। राजस्व विभाग के ई-कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक इन प्रकरणों में अब तक कुल 121 पेशियां हो चुकी हैं, लेकिन जमीन आवंटन का अंतिम निर्णय अब तक नहीं हो सका।
इस देरी का खामियाजा अब इंसानों के साथ बेजुबान मवेशियों को भी भुगतना पड़ रहा है। गौ-अभयारण्य नहीं बनने से बड़ी संख्या में मवेशी सड़कों और नेशनल हाईवे पर डेरा जमाए रहते हैं। बोड़ला की रामा गौशाला के सुनील केशरवानी के अनुसार, पिछले दो माह में हाईवे पर वाहनों की चपेट में आने से 100 से अधिक गौवंश की मौत हो चुकी है। इनमें करीब 20 मवेशियों का अंतिम संस्कार उनकी समिति ने किया है।
हाईवे पर मवेशियों की मौजूदगी से लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। हादसों में दो लोगों की जान जाने और कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। तीन दिन पहले बोड़ला हाईवे पर मवेशी को बचाने के प्रयास में दो ट्रकों की भीषण भिड़ंत हुई, जिसमें दो लोग घायल हुए।
कवर्धा। बोड़ला तहसील कार्यालय के पास सड़क पर खड़े मवेशी।
राजस्व ई-कोर्ट केस फाइल : चार प्रोजेक्ट, 121 पेशियां और नतीजा शून्य
जैतपुरी : 46 पेशियां
ग्राम जैतपुरी में गौ-अभयारण्य के लिए करीब 20 हेक्टेयर यानी 49 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। बोड़ला तहसील में 18 सितंबर 2024 को प्रकरण दर्ज हुआ। 7 सितंबर 2026 तक 46 पेशियां हो चुकी हैं।
पचराही : 18 पेशियां
पचराही में गौ-अभयारण्य के लिए करीब 29 हेक्टेयर यानी 79 एकड़ जमीन की जरूरत है। तरेगांव जंगल तहसील में 28 अगस्त 2024 को प्रकरण दर्ज हुआ। 28 अगस्त 2026 तक 18 पेशियां हो चुकी हैं।
पचराही गौधाम व प्रशिक्षण केंद्र : 11 पेशियां
पचराही में 17 एकड़ में गौधाम एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया जाना है। इसका प्रकरण 2 जनवरी 2025 को तरेगांव जंगल तहसील में दर्ज हुआ। 14 अगस्त 2026 तक 11 पेशियां हो चुकी हैं।
सरेखा : 46 पेशियां
ग्राम सरेखा में गौ-अभयारण्य के लिए करीब 12 हेक्टेयर यानी 30 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। बोड़ला तहसील में 18 सितंबर 2024 को प्रकरण दर्ज हुआ। अब तक 46 पेशियां हो चुकी हैं। अगली तारीख 21 सितंबर है।
जमीन आधिपत्य में, 3.97 करोड़ मंजूर; जल्द शुरू होगा काम
पशु चिकित्सा विभाग के प्रभारी उपसंचालक डॉ. आशीष देवांगन ने बताया कि सरेखा, पचराही और जैतपुरी में गौधाम एवं गौ-अभयारण्य शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। भूमि आवंटन के लिए राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया है।
उनके अनुसार, औपचारिक आवंटन प्रक्रिया भले ही चल रही हो, लेकिन जमीन विभाग के आधिपत्य में आ चुकी है। पचराही प्रोजेक्ट के लिए 2.68 करोड़ रुपए तथा जैतपुरी और सरेखा के लिए 1.29 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
सी जी एन न्यूज़ इनसाइट
गौधाम समितियां भी आर्थिक मदद के इंतजार में
मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए गौधाम योजना भी संचालित की जा रही है, लेकिन समितियों को अब तक शासन से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार जिले में 10 समितियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 8 सक्रिय हैं।
समितियों के अनुसार योजना में शामिल होने के लिए 30 से 50 हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। पंजीयन प्रक्रिया के लिए ही 27 हजार रुपए का डीडी जमा करना पड़ा। मार्च 2026 से प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद अब तक किसी भी समिति को शासन की ओर से आर्थिक मदद नहीं मिली है।
बड़ा सवाल
जब गौ-अभयारण्य के लिए जमीन प्रस्तावित है, बजट स्वीकृत है और विभाग के अनुसार जमीन आधिपत्य में भी आ चुकी है, तो 121 पेशियों के बाद भी औपचारिक आवंटन क्यों नहीं हो पाया?




