गुण्डाधुर सम्मान की चमक के पीछे संघर्ष की काली रात, दलिया खाकर पैरालंपिक की तैयारी कर रही छोटी मेहरा
हाइट के कारण नौकरी तक नहीं दे रहे लोग, 2028 पैरालंपिक की तैयारी में 500 रुपए के जूतों का सहारा

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
सरकारी मंच पर जब किसी खिलाड़ी के सम्मान में तालियां बजती हैं तो लगता है कि उसकी जिंदगी बदल गई होगी। लेकिन सम्मान की चमक के पीछे छिपी हकीकत कई बार बेहद कड़वी होती है। वर्ष 2024 में राज्य के सर्वोच्च खेल सम्मान गुण्डाधुर पुरस्कार से सम्मानित पैरा-एथलीट छोटी मेहरा आज भी बुनियादी सुविधाओं और बेहतर डाइट के लिए संघर्ष कर रही हैं। देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने और वर्ष 2028 के लॉस एंजिल्स पैरालंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करने का सपना देखने वाली छोटी के पास एथलीट वाली डाइट तो दूर, अभ्यास के लिए महज 500 रुपए के सामान्य जूतों का सहारा है।
प्रोफेशनल डाइट की जगह दलिया और दूध
एक प्रोफेशनल पैरा-एथलीट के लिए नियमित डाइट में काजू, बादाम, अंडे, मछली, प्रोटीन पाउडर और पर्याप्त दूध जैसी पोषणयुक्त चीजें जरूरी होती हैं। ऐसी डाइट पर हर महीने करीब 25 हजार रुपए तक खर्च हो सकता है। आर्थिक तंगी के कारण छोटी फिलहाल दलिया और घर में उपलब्ध दूध से ही गुजारा कर रही हैं।
खेल मैदान में जहां बेहतर स्पाइक्स और स्पोर्ट्स शूज की जरूरत होती है, वहां छोटी 500 रुपए के सामान्य जूतों में ही पसीना बहा रही हैं। इसके बावजूद उनके प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आई और वह लगातार पदक जीत रही हैं।
जर्जर मकान, पिता का निधन और चाय की दुकान से चलता घर
छोटी मेहरा जिस मकान में रहती हैं, उसकी टीन की छत और अन्य हिस्सा अब जर्जर हालत में है। वर्ष 2023 में उनके पिता का निधन हो चुका है। दो भाइयों और तीन बहनों वाले परिवार की जिम्मेदारी अब छोटे भाई के कंधों पर है।
भाई छोटी सी चाय की दुकान चलाता है। दिनभर मेहनत के बाद बमुश्किल 200 से 300 रुपए बचते हैं। इसी कमाई से परिवार का चूल्हा जलता है और छोटी की प्रैक्टिस का थोड़ा-बहुत खर्च भी निकलता है। परिवार के पास आय का कोई दूसरा नियमित साधन नहीं है।
बौनेपन का मजाक उड़ाते थे लोग, कोच ने दिखाई राह
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए छोटी मेहरा भावुक हो जाती हैं। वह बताती हैं कि बचपन से ही उनकी कम हाइट को लेकर लोग उनका मजाक उड़ाते थे। लोग कहते थे कि उनका विकास कभी नहीं होगा। तानों से आहत होकर उन्होंने घर से बाहर निकलना तक कम कर दिया था और सामाजिक कार्यक्रमों से भी दूरी बनाने लगी थीं।
वर्ष 2019 में कोच वसीम रजा कुरैशी ने उनकी प्रतिभा पहचानी। उन्होंने छोटी को हौसला दिया और जिद करके मैदान तक लेकर आए। इसके बाद पैरा-एथलेटिक्स का प्रशिक्षण शुरू हुआ। कोच ने उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया और छोटी ने भी अपनी मेहनत के दम पर लगातार सफलता हासिल की।
2021 से 2025 तक पदकों की झड़ी
छोटी मेहरा ने वर्ष 2021 से 2025 तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में कई गोल्ड और सिल्वर मेडल हासिल किए हैं। 2023 में खेलो इंडिया सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
प्रमुख उपलब्धियां—
2021, हैदराबाद राष्ट्रीय प्रतियोगिता: 1 गोल्ड, 1 सिल्वर
2022, कुशीनगर राष्ट्रीय स्तर: 2 गोल्ड, 2 सिल्वर
2022, हैदराबाद राष्ट्रीय प्रतियोगिता: 2 गोल्ड, 1 सिल्वर
2023, दिल्ली राष्ट्रीय प्रतियोगिता: 2 गोल्ड
2023, दिल्ली 5वीं इंडिया ओपन: 1 गोल्ड
2023, दिल्ली खेलो इंडिया: 2 गोल्ड, 2 सिल्वर
2024, गोवा नेशनल: 2 सिल्वर
2024, गुड़गांव: मेडल प्राप्त
2025, रांची राष्ट्रीय प्रतियोगिता: 1 गोल्ड, 2 सिल्वर
2025, दिल्ली राष्ट्रीय प्रतियोगिता: 1 गोल्ड, 2 सिल्वर
2025, दिल्ली इंटरनेशनल प्रतियोगिता: 2 मेडल
मिली स्कूटी, लेकिन पेट नहीं भरता
गुण्डाधुर सम्मान मिलने के बाद जिंदगी में क्या बदलाव आया, इस सवाल पर छोटी का दर्द छलक पड़ता है। वह बताती हैं कि सम्मान के साथ उन्हें एक स्कूटी मिली। पुरस्कार के साथ मिली राशि से कुछ समय तक डाइट और घर का राशन चलाया, लेकिन उसके बाद हालात फिर पहले जैसे हो गए।
छोटी कहती हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि वर्षों से लगातार मेडल जीतने के बाद सरकार उन्हें नौकरी का अवसर देगी। उन्होंने होटल में भी काम तलाशने की कोशिश की, लेकिन कम हाइट देखकर लोग काम देने को तैयार नहीं हुए।
लगातार उपेक्षा और आर्थिक परेशानी के कारण कई बार उनका मन खेल छोड़ने का भी होता है। लेकिन देश के लिए मेडल जीतने का सपना उन्हें दोबारा मैदान में खींच लाता है।
जिम्मेदार अधिकारी बोले—जानकारी नहीं मिली, चेक करवाते हैं
मामले को लेकर डिप्टी कलेक्टर एवं जिला खेल अधिकारी रुचि शार्दुल ने कहा कि उन्हें छोटी मेहरा की आर्थिक स्थिति और मौजूदा परेशानियों की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति है तो मामले की जानकारी लेकर जांच करवाएंगे।
सवाल यह है—सम्मान के बाद सहारा कौन देगा?
छोटी मेहरा की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि उन प्रतिभाओं की तस्वीर भी है जो पदक तो जीतती हैं, लेकिन अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करती हैं। सरकार और खेल विभाग से उम्मीद है कि गुण्डाधुर पुरस्कार से सम्मानित इस प्रतिभावान पैरा-एथलीट को सिर्फ सम्मान और स्कूटी तक सीमित न रखकर प्रशिक्षण, पोषण, खेल सामग्री, आवास और रोजगार के लिए ठोस सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि 2028 पैरालंपिक का उनका सपना आर्थिक मजबूरियों के कारण अधूरा न रह जाए।





