53 करोड़ का ठेका, फिर भी पोड़ी में 1.59 किमी सड़क बदहाल
चार घंटे चक्काजाम के बाद प्रशासन जागा, चार दिन में गड्ढे भरने का आश्वासन; समयसीमा के बावजूद धीमे निर्माण पर उठे सवाल

CGN News | कवर्धा/पोड़ी
नेशनल हाईवे-130 (ए) पर ग्राम पोड़ी में अधूरी और बदहाल सड़क को लेकर गुरुवार को किसानों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। सड़क निर्माण, गन्ना बोनस और गन्ने को कृषक उन्नति योजना में शामिल करने की मांग को लेकर समृद्ध छत्तीसगढ़ किसान संघ ने हनुमान गार्डन के पास करीब चार घंटे तक चक्काजाम किया। दोपहर 2 बजे शुरू हुआ आंदोलन शाम 6 बजे समाप्त हुआ। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आंदोलन के दबाव में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत करनी पड़ी। अधिकारियों ने चार दिन के भीतर सड़क को आवागमन योग्य बनाने का आश्वासन दिया। इसके बाद गड्ढों में मुरुम-मिट्टी डालकर तत्काल सुधार कार्य शुरू कराया गया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय में सड़क नहीं सुधरी तो दोबारा चक्काजाम किया जाएगा।
53.21 करोड़ का ठेका, फिर भी 1.59 किमी हिस्सा बेहाल
इस सड़क परियोजना को लेकर सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गति और कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 (ए) के वन टाइम इम्प्रूवमेंट कार्य के लिए भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से 65.91 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली है, जबकि करीब 53.219 करोड़ रुपए का ठेका जारी किया गया है। इसके बावजूद पोड़ी में करीब 1.590 किमी सड़क अब भी बदहाल है।
सड़क के एक हिस्से में कांक्रीटीकरण हो चुका है, जबकि दूसरा हिस्सा बारिश के बाद कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया है। ऐसे में भारी वाहनों सहित दोपहिया और चारपहिया चालकों को जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है।
12 महीने की समयसीमा, फिर भी निर्माण की रफ्तार पर सवाल
तकनीकी जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर ने 23 फरवरी 2026 को कार्यादेश जारी किया था। कुल 15.275 किलोमीटर के वन टाइम इम्प्रूवमेंट कार्य को 22 फरवरी 2027 तक पूरा किया जाना है। भले ही निर्धारित समयसीमा अभी बाकी है, लेकिन पोड़ी जैसे व्यस्त हिस्से में सड़क की वर्तमान स्थिति ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों ने मांग की है कि सड़क निर्माण में केवल गति ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता की भी सख्ती से निगरानी की जाए। उनका आरोप है कि बारिश के दौरान सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है।
चार दिन में सुधार नहीं तो फिर होगा आंदोलन
चक्काजाम कर रहे किसानों ने कहा कि वे लंबे समय से सड़क की बदहाली झेल रहे हैं। बार-बार शिकायत और आश्वासन के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। किसानों ने दो टूक कहा कि चार दिन में सड़क चलने लायक नहीं हुई तो फिर हाईवे पर आंदोलन किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के एसडीओ एआर पैगवार ने कहा कि पोड़ी में सड़क का काम निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
पक्की सड़क पर मवेशी और बेतरतीब पार्किंग भी मुसीबत
अधूरी सड़क के साथ तैयार हो चुके कांक्रीट हिस्से पर मवेशियों का जमावड़ा और वाहनों की बेतरतीब पार्किंग भी यातायात में बाधा बन रही है। इससे सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाती है और आमने-सामने से आने वाले वाहनों को निकलने में परेशानी होती है। बारिश के दौरान कीचड़ और गड्ढों के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण पूरा होने तक कम से कम सुरक्षित आवागमन की अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
45 रुपए बोनस पर भी किसान असंतुष्ट
गन्ना किसानों को सरकार की ओर से 45 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने पर सहमति बनने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन समृद्ध छत्तीसगढ़ किसान संघ इससे संतुष्ट नहीं है। संगठन का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत, मजदूरी, खाद-बीज और अन्य खर्चों को देखते हुए 45 रुपए प्रति क्विंटल बोनस पर्याप्त नहीं है। किसानों ने गन्ने का उचित मूल्य देने की मांग की है।
सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार और करोड़ों के ठेके के बावजूद हाईवे के महत्वपूर्ण हिस्से का कीचड़ और गड्ढों में तब्दील होना अब सिर्फ ग्रामीणों की परेशानी नहीं रह गया है। चार घंटे के चक्काजाम ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि चार दिन में सड़क वास्तव में सुधरती है या किसानों को दोबारा सड़क पर उतरना पड़ता है।




