छात्रावास भगवान भरोसे! एक माह से नदारद अधीक्षिका, नगर सैनिक के भरोसे चल रहा पोस्ट मैट्रिक छात्रावास

कवर्धा। नगर स्थित शासकीय पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रावास की वास्तविक स्थिति जानने पहुंची मीडिया टीम को जो तथ्य मिले, वे विभागीय कार्यप्रणाली और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं।
जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय के सामने स्थित इस 50 सीटर छात्रावास में अधीक्षिका के पद पर संगीता लांजेकर पदस्थ हैं। निरीक्षण के दौरान अधीक्षिका छात्रावास में मौजूद नहीं मिलीं। मौके पर केवल एक महिला मिली, जिसने अपना नाम सोनम ध्रुव बताते हुए स्वयं को नगर सैनिक बताया। हैरानी की बात यह रही कि वह ड्यूटी के दौरान निर्धारित वर्दी के बजाय सादे कपड़ों में मौजूद थी।
जब नगर सैनिक से अधीक्षिका की अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि अधीक्षिका पिछले लगभग एक माह से छात्रावास में नहीं रह रही हैं। उन्होंने अपना निवास कहीं और बना लिया है और वहीं से आना-जाना करती हैं। मीडिया टीम के पहुंचने की सूचना मिलने के बाद भी अधीक्षिका को छात्रावास पहुंचने में लगभग 45 मिनट का समय लग गया।
यह छात्रावास कक्षा नौवीं से लेकर स्नातक तक की छात्राओं के लिए संचालित है। ऐसे में अधीक्षिका का लगातार छात्रावास से अनुपस्थित रहना न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा और निगरानी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रात के समय किसी छात्रा की तबीयत बिगड़ जाए, कोई अप्रिय घटना घट जाए या किसी आपात स्थिति का सामना करना पड़े, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अधीक्षिका की अनुपस्थिति में छात्रावास आखिर किसके भरोसे संचालित हो रहा है?
इस पूरे मामले ने आदिवासी छात्रावासों की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब देखना होगा कि सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।





