विविध

रेट लिस्ट की आड़ में किराए का खेल: तय 20, वसूली 100 से 200 रुपए तक

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कवर्धा के नए हाईटेक बस स्टैंड के शुरू होने के बाद ऑटो और ई-रिक्शा किराए को लेकर यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। ऑटो चालक संघ की ओर से अलग-अलग रूट के लिए किराया रेट लिस्ट जारी होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में रेट लिस्ट और यात्रियों से वसूले जा रहे किराए के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कई यात्रियों का आरोप है कि निर्धारित किराए से अधिक राशि मांगने पर चालक अपनी सुविधा के अनुसार किराया तय कर देते हैं।
रेट लिस्ट में 20 रुपए, अकेले यात्री से 100-200 रुपए
नए बस स्टैंड से पुराने बस स्टैंड तक करीब 3 किलोमीटर के सफर का किराया 20 रुपए प्रति यात्री बताया जा रहा है। लेकिन यदि कोई यात्री अकेले नए बस स्टैंड से राजमहल चौक, कलेक्ट्रेट, एसपी कार्यालय, तहसील कार्यालय या जिला अस्पताल जाना चाहता है तो कई चालक इसे सामान्य किराए के बजाय ‘स्पेशल’ सवारी बताते हैं। यात्रियों के अनुसार ऐसी स्थिति में 100 से 200 रुपए तक की मांग की जाती है।
यानी एक ही वाहन, एक ही सड़क और लगभग समान दूरी—लेकिन यात्री बदलते ही किराया कई गुना हो जाता है। सवाल यह है कि स्पेशल सवारी के नाम पर अतिरिक्त किराया लेने का अधिकृत प्रावधान है या यह चालक की अपनी दर है?
रेट लिस्ट से भी ज्यादा वसूली की शिकायत
मामला सिर्फ स्पेशल बुकिंग तक सीमित नहीं है। यात्रियों का कहना है कि कई बार ऑटो चालक संघ की बताई गई रेट लिस्ट से भी अधिक किराया मांगते हैं। ऐसे में रेट लिस्ट का वास्तविक उपयोग क्या है और उसकी निगरानी कौन करता है, यह स्पष्ट नहीं है।
यदि किराया राज्य स्तर पर निर्धारित है, तो शहर में प्रदर्शित रेट लिस्ट किस आधार पर बनाई गई? और यदि संघ ने आपसी सहमति से दरें तय की हैं, तो क्या उन्हें संबंधित विभाग से अधिकृत कराया गया है? इन सवालों के जवाब यात्रियों को नहीं मिल रहे हैं।
13 किमी और 3 किमी का किराया बराबर क्यों?
किराए की विसंगति का एक उदाहरण पोंड़ी-कवर्धा रूट भी सामने आता है। पोंड़ी से कवर्धा की दूरी करीब 13 किलोमीटर है और वहां से कवर्धा आने का किराया करीब 20 रुपए बताया जा रहा है। दूसरी ओर, नए बस स्टैंड से पुराने बस स्टैंड तक करीब 3 किलोमीटर की दूरी के लिए भी प्रति यात्री 20 रुपए लिए जा रहे हैं।
इस तुलना ने शहर की ऑटो किराया व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि किराया दूरी के आधार पर तय है या रूट के नाम पर?
400 ऑटो का दावा, सूची में सिर्फ 128
ऑटो संघ के अनुसार शहर में करीब 400 ऑटो और ई-रिक्शा संचालित हैं। वहीं मंगलवार को यातायात पुलिस की बैठक में संघ की ओर से केवल 128 ऑटो-ई-रिक्शा की सूची उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई। इससे करीब 270 से अधिक वाहनों के सत्यापन और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदारी पर विभागों के अलग-अलग जवाब
परिवहन विभाग का कहना है कि ऑटो और ई-रिक्शा का किराया राज्य स्तर पर निर्धारित होता है और प्रदेश में अंतिम बार वर्ष 2015 में किराया निर्धारित किया गया था। यातायात पुलिस का कहना है कि किराया तय करना उसका काम नहीं है। वहीं नगर पालिका भी किराया निर्धारण से खुद को अलग बता रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि कोई चालक निर्धारित दर से अधिक किराया लेता है तो यात्री शिकायत कहां करे और कार्रवाई कौन करेगा?
यात्रियों की मांग है कि प्रशासन शहर के सभी प्रमुख रूट का अधिकृत किराया सार्वजनिक करे, प्रत्येक ऑटो में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराए और निर्धारित दर से अधिक वसूली करने वाले चालकों पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाए।

Advertisement Advertisement 2

Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button