धान घोटाले में बड़ा खुलासा: बचने की पहले से रची गई थी साजिश, मुख्य आरोपी के घर से 16 लाख नकद जब्त

कवर्धा। सहसपुर लोहारा, बासिनझोरी और बीरनपुर खरीदी केंद्रों में 81.19 लाख रुपये के 2441 क्विंटल धान घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी एवं समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी ने कथित तौर पर कार्रवाई से बचने के लिए पहले से ही दस्तावेजी रणनीति तैयार कर रखी थी। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके घर और कार्यालय में छापेमारी की, हालांकि वह फरार मिला। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके घर से 16 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार धान खरीदी के दौरान ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनके आधार पर भविष्य में जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा सके। कई तौल पर्चियों में किसानों के हस्ताक्षर तो मिले, लेकिन खरीदी प्रभारी, फड़ प्रभारी और तौलक के कॉलम खाली पाए गए। यही दस्तावेज अब जांच का सबसे अहम आधार बन गए हैं और इनसे मामले में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि समिति के ऑनलाइन पोर्टल पर धान का स्टॉक लगातार उपलब्ध दिखाया जाता रहा, जबकि भौतिक सत्यापन में गोदाम खाली मिले। डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच लंबे समय तक बना यह अंतर अब पूरे घोटाले की जांच का प्रमुख आधार बन गया है। पुलिस जब्त किए गए लैपटॉप और बैंक लेन-देन की भी जांच कर रही है ताकि धान की निकासी, बिक्री और भुगतान से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा सकें।
सहसपुर लोहारा थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि मामले में गंगादास मानिकपुरी के अलावा बलदाऊ डड़सेना, बिहारी राम साहू, तुकाराम साहू, पीलूराम साहू और महावीर साहू को भी आरोपी बनाया गया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।




