सहसपुर लोहारा बीईओ कार्यालय में बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर
30 कर्मचारियों का गलत वेतन आहरण, ऑडिट में सामने आई गंभीर अनियमितताएं

कवर्धा/सहसपुर लोहारा। जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जिला ऑडिट टीम की जांच में खुलासा हुआ है कि कार्यालय में पदस्थ 30 अधिकारियों और कर्मचारियों का मूल वेतन गलत तरीके से निकाला जा रहा था। इस खुलासे ने शिक्षा विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑडिट टीम ने जब बीईओ कार्यालय में संधारित सेवा पुस्तिकाओं, बिल रजिस्टर, कैश बुक और वेतन देयकों का मिलान किया, तो कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। जुलाई 2025 में आहरित वेतन के परीक्षण में पाया गया कि कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका में दर्ज मूल वेतन और वास्तविक भुगतान में भारी अंतर है। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि सभी 30 कर्मचारियों का मूल वेतन गलत तरीके से आहरित किया जा रहा है।
नॉमिनेशन और सत्यापन में भारी लापरवाही
जांच में यह भी सामने आया कि 30 कर्मचारियों में से केवल एक कर्मचारी का नॉमिनेशन पूर्ण था, जबकि बाकी 29 कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं में आवश्यक जानकारी अधूरी पाई गई। किसी भी आकस्मिक स्थिति में परिवार को मिलने वाले शासकीय लाभ की प्रक्रिया तक पूरी नहीं की गई थी।
इतना ही नहीं, 31 मार्च 2025 तक कर्मचारियों के वार्षिक सेवा सत्यापन की प्रक्रिया भी लगभग पूरी तरह उपेक्षित मिली। केवल एक कर्मचारी का सत्यापन किया गया था, जबकि बाकी कर्मचारियों का रिकॉर्ड अधूरा था।
सेवा पुस्तिकाओं में हस्ताक्षर तक नहीं
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कई कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं में स्वयं कर्मचारियों के हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं हैं। शासकीय समूह बीमा योजना (जीआईएस) की प्रविष्टियां भी अधूरी पाई गईं। कर्मचारियों के अर्जित एवं चिकित्सा अवकाश का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं किया गया था।
डीईओ ने दिए जांच और सुधार के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा ने तत्कालीन बीईओ एसके भास्कर को पत्र जारी कर दो सप्ताह के भीतर सभी अनियमितताओं का बिंदुवार निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि संबंधित कक्ष लिपिक के सहयोग से ऑडिट रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर कर विस्तृत जानकारी जिला कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।
सूत्रों के अनुसार अब इस पूरे मामले में विस्तृत जांच की तैयारी की जा रही है। यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि गलत वेतन भुगतान का यह सिलसिला कितने वर्षों से चल रहा था और इससे सरकारी खजाने को कितनी आर्थिक क्षति पहुंची।




