हाफ नदी सूखी: 200 गांवों में निस्तारी संकट, भूजल स्तर तेजी से गिरा

पंडरिया | सी जी ऐन न्यूज़ कवर्धा
पंडरिया क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली हाफ नदी इस साल गर्मी शुरू होते ही पूरी तरह सूख गई है। करीब 45 किलोमीटर लंबी यह नदी, जिस पर 200 से अधिक गांवों की आजीविका निर्भर है, अब कई स्थानों पर रेत के मैदान में तब्दील हो चुकी है। नदी में सिर्फ कुछ गड्डों में ही पानी बचा है, जो जल्द खत्म होने की कगार पर है। अप्रैल महीने में ही ऐसे हालात सामने आने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
नगर से लगे बिशेसरा गांव के आगे नदी का प्रवाह लगभग समाप्त हो गया है। जहां-जहां स्टॉप डेम बने हैं, वहीं थोड़ी बहुत जलराशि बची है, जबकि बाकी हिस्सों में नदी पूरी तरह सूख चुकी है। इसका सीधा असर आसपास के गांवों में जलस्तर पर पड़ा है। हैंडपंपों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है और कई हैंडपंप जवाब देने लगे हैं।
नवागांव, धोबघट्टी, डोमसरा, पिपरखूंटी, बरहट्टा, दुल्लापुर और अखरा सहित कई गांवों में पानी की किल्लत के संकेत दिखने लगे हैं। इन गांवों के लोग निस्तारी और दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह हाफ नदी पर निर्भर हैं। नदी के सूखते ही जल संकट गहराने लगा है।
मैकल पर्वत श्रृंखला से निकलने वाली हाफ नदी बेमेतरा होते हुए शिवनाथ नदी में मिलती है। यह कबीरधाम जिले की सबसे लंबी और प्रमुख नदी मानी जाती है। खेती, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और घरेलू उपयोग सहित हर जरूरत के लिए ग्रामीण इस पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 10-12 वर्षों में नदी की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। जो नदी पहले सालभर बहती थी, वह अब मौसमी बन गई है और मार्च-अप्रैल में ही सूखने लगी है। इसके पीछे अनियंत्रित जल दोहन, रेत खनन और मानवीय हस्तक्षेप को मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि 2020-21 में कोरोना काल के दौरान नदी नहीं सूखी थी, लेकिन उसके बाद लगातार हर साल स्थिति बिगड़ती गई है।
कुबा खुर्द से बनिया कुबा के बीच करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में बिशेसरा, रौह्य, मंझोली, देवपुरा, धोबपट्टी, नवागांव, डोमसरा, पिपरखूंटी और खराट्टा जैसे गांव गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन क्षेत्रों में स्टॉप डेम बनाए जाएं तो पानी का संचय हो सकता है और राहत मिल सकती है।
जल संसाधन विभाग पंडरिया के एसडीओ कौशल किशोर शर्मा के अनुसार, “गांवों की जरूरत के हिसाब से स्टॉप डेम बनाए जा रहे हैं और जहां आवश्यकता होगी, वहां प्रस्ताव भेजे जाएंगे।” उन्होंने बताया कि पिछले पखवाड़े से पड़ रही भीषण गर्मी के कारण वाष्पीकरण बढ़ा है, जिससे नदी, तालाब और जलाशयों का जलस्तर तेजी से घटा है।
स्थिति को देखते हुए अब ग्रामीणों को आगामी गर्मी के महीनों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि समय रहते ठोस उपाय कर इस संकट को कम किया जाए।





