
कवर्धा/धमतरी/दुर्ग, 1 अप्रैल
जिले के सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा शुरू होते ही बड़ा विवाद सामने आया है। 30 मार्च से प्रारंभ हुई परीक्षाओं में कबीरधाम, धमतरी और दुर्ग जिलों के प्रश्न पत्र एक जैसे पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि केवल प्रश्न ही नहीं, बल्कि निर्देश, प्रश्न क्रमांक और पूरा फॉर्मेट भी हूबहू समान है। इसे महज संयोग न मानते हुए गंभीर लापरवाही या संभावित गड़बड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
शुरुआती जांच में सामने आई समानता
प्रारंभिक जांच में कक्षा चौथी के हिंदी, कक्षा छठवीं के गणित और कक्षा सातवीं के हिंदी विषय के प्रश्न पत्रों का मिलान किया गया। तीनों जिलों के पेपर पूरी तरह समान पाए गए। इससे आशंका जताई जा रही है कि अन्य कक्षाओं और विषयों के प्रश्न पत्र भी एक जैसे हो सकते हैं।
अलग समितियों के बावजूद कैसे एक जैसे पेपर?
नियमों के अनुसार हर जिले में प्रश्न पत्र निर्माण, मॉडरेशन और परीक्षा संचालन के लिए अलग-अलग समितियां गठित की जाती हैं। ऐसे में तीन जिलों के प्रश्न पत्रों का एक जैसा होना कई सवाल खड़े कर रहा है। शिक्षा से जुड़े संगठनों ने इसे “सुनियोजित गड़बड़ी” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
दूसरे जिले के पेपर छापने की आशंका
एसोसिएशन का दावा है कि इतनी समानता केवल संयोग नहीं हो सकती। संभावना जताई जा रही है कि कुछ जिलों ने स्वयं प्रश्न पत्र तैयार करने के बजाय दूसरे जिले के प्रश्न पत्र को ही छपवा लिया। कागजों में समिति बनाकर औपचारिकता पूरी की गई और नियमों का पालन नहीं किया गया।
समय सारणी भी एक जैसी, संदेह और गहरा
केवल प्रश्न पत्र ही नहीं, बल्कि तीनों जिलों की परीक्षा समय सारणी भी पूरी तरह समान पाई गई है। कक्षा पहली से चौथी, छठवीं और सातवीं तक सभी विषयों की तिथियां और क्रम एक जैसे हैं, जिससे पूरे परीक्षा प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।
पहले भी सामने आ चुकी है गड़बड़ी
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2024-25 की अर्धवार्षिक परीक्षा में पिछले वर्ष (2023-24) के प्रश्न पत्र दोहराए जाने का मामला सामने आया था। उस समय परीक्षा को स्थगित करना पड़ा था। अब एक बार फिर वार्षिक परीक्षा में ऐसी ही स्थिति सामने आई है।
नियमों के उल्लंघन के आरोप
शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक जिले को ब्लूप्रिंट के आधार पर तीन सेट प्रश्न पत्र तैयार करने थे, जिनकी मॉडरेशन समिति द्वारा जांच की जानी थी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी की अनुशंसा पर ही प्रश्न पत्र छपने थे। वर्तमान मामला इन निर्देशों के उल्लंघन की ओर संकेत करता है।
कार्रवाई की मांग
पूरा मामला सामने आने के बाद जिम्मेदारी तय कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो। वहीं संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।




