मेडिकल कॉलेज के बाद अब कबीरधाम में फिजियोथेरेपी कॉलेज की जरूरत, इलाज के साथ पुनर्वास की सुविधा भी हो स्थानीय स्तर पर

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा । ब्रजेश गुप्ता
कवर्धा। कबीरधाम जिले में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की नई उम्मीद जगी है। अब जिले में फिजियोथेरेपी कॉलेज एवं आधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर शुरू करने की मांग और जरूरत सामने आ रही है। मेडिकल कॉलेज में गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं का इलाज उपलब्ध होने के बाद मरीजों के लिए उपचार के अगले महत्वपूर्ण चरण रिहैबिलिटेशन यानी पुनर्वास की सुविधा भी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होना जरूरी है।
वर्तमान में जिले के विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी की पढ़ाई के लिए रायपुर, दुर्ग-भिलाई और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। वहीं दुर्घटना, फ्रैक्चर, नसों की समस्या, रीढ़ की बीमारी, स्ट्रोक, ऑपरेशन के बाद कमजोरी और अन्य कारणों से लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की जरूरत वाले मरीजों को भी कई बार दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे मरीज और उनके परिजनों का समय, यात्रा और इलाज का खर्च बढ़ जाता है।
इलाज के बाद मरीज को पुनर्वास की सबसे ज्यादा जरूरत
किसी मरीज का ऑपरेशन या प्राथमिक उपचार हो जाने के बाद उसकी पूरी रिकवरी अपने आप नहीं होती। कई मामलों में मांसपेशियों की ताकत वापस लाने, चलने-फिरने की क्षमता सुधारने, शरीर की गतिविधियों को सामान्य करने और दर्द कम करने के लिए लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है।
खासकर सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीज, फ्रैक्चर के बाद के मरीज, रीढ़ और कमर की समस्या से पीड़ित लोग, स्ट्रोक के बाद के मरीज, बुजुर्ग तथा ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन कराने वाले मरीजों के लिए फिजियोथेरेपी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
मेडिकल कॉलेज से जुड़ा तो मिलेगा बेहतर लाभ
यदि मेडिकल कॉलेज परिसर या उससे संबद्ध व्यवस्था के तहत फिजियोथेरेपी कॉलेज शुरू किया जाता है तो इसका लाभ शिक्षा और उपचार दोनों क्षेत्रों में मिल सकता है। विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर मिल सकता है। वहीं मरीजों को विशेषज्ञों की देखरेख में फिजियोथेरेपी और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
मेडिकल कॉलेज में ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी, सर्जरी और अन्य विभागों से आने वाले मरीजों के लिए फिजियोथेरेपी सेवाएं उपचार की कड़ी को और मजबूत कर सकती हैं।
स्थानीय युवाओं के लिए खुलेगा नया पाठ्यक्रम
फिजियोथेरेपी कॉलेज शुरू होने का एक बड़ा फायदा स्थानीय विद्यार्थियों को होगा। जिले के छात्र-छात्राओं को बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) जैसे पाठ्यक्रम के लिए दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी। इससे स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
भविष्य में प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, पुनर्वास केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे सकेंगे।
गांवों तक पहुंचाना भी होगा लक्ष्य
कबीरधाम जैसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले जिले में फिजियोथेरेपी की सुविधा केवल जिला मुख्यालय तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। मेडिकल कॉलेज से जुड़े फिजियोथेरेपी विभाग के माध्यम से समय-समय पर ब्लॉक और ग्रामीण क्षेत्रों में पुनर्वास एवं फिजियोथेरेपी शिविर आयोजित किए जा सकते हैं। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और दुर्घटना के बाद लंबे समय तक उपचार की जरूरत वाले मरीजों को फायदा मिल सकता है।
मेडिकल कॉलेज के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की अगली कड़ी
मेडिकल कॉलेज किसी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में केवल बीमारी का इलाज ही पर्याप्त नहीं माना जाता। मरीज को उपचार के बाद सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए पुनर्वास सेवाओं की भी आवश्यकता होती है। ऐसे में कबीरधाम में मेडिकल कॉलेज के साथ फिजियोथेरेपी शिक्षा और उपचार की सुविधा विकसित करना स्वास्थ्य व्यवस्था की अगली महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।
अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर मेडिकल कॉलेज की भविष्य की योजनाओं में फिजियोथेरेपी कॉलेज, आधुनिक रिहैबिलिटेशन सेंटर और प्रशिक्षित मानव संसाधन की व्यवस्था को भी शामिल करने पर विचार किया जाए।



