मेरी गोद में बसा है नर्मदा कुंड, 117 साल पहले अंग्रेजी किताबों में दर्ज हुई मेरी कहानी
झिरना: आस्था, इतिहास और प्रकृति की अनोखी पहचान

ब्रजेश गुप्ता
कवर्धा जिले से कुछ दूरी पर, रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 के पास बसा छोटा सा गांव झिरना अपनी शांत वादियों, प्राचीन आस्था और ऐतिहासिक विरासत के कारण अलग पहचान रखता है। यह गांव केवल एक साधारण बस्ती नहीं, बल्कि लोकविश्वास, धार्मिक आस्था और इतिहास का जीवंत दस्तावेज है।
झिरना की सबसे बड़ी पहचान है यहां स्थित पवित्र नर्मदा कुंड। ग्रामीणों की मान्यता है कि यह जलस्रोत धरती से स्वयं प्रकट हुआ था। लोककथाओं के अनुसार, राजा धर्मराज सिंह की चौथी पीढ़ी की बुआ रेवाकुंवर ने अमरकंटक में मां नर्मदा से प्रार्थना की थी। इसके बाद झिरना की धरती से जल फूटा और लोगों ने उसे मां नर्मदा का स्वरूप मान लिया। बाद में यहां पत्थरों से कुंड का निर्माण कराया गया तथा भोरमदेव से शिवलिंग लाकर मंदिर की स्थापना की गई।
आज यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। कुंड के समीप स्थित प्राचीन शिव मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है। मंदिर की घंटियों और दीपों की रोशनी से वातावरण भक्तिमय बना रहता है। विशेष रूप से माघ पूर्णिमा पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि एक समय यह मेला पूरे एक महीने तक चलता था और कोलकाता तक से व्यापारी यहां व्यापार करने आया करते थे।
झिरना का उल्लेख केवल लोककथाओं में ही नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है। वर्ष 1909 में अंग्रेजी लेखक ईएडी ब्रेट ने अपनी पुस्तक “छत्तीसगढ़ फ्यूडेटरी स्टेट” में इस गांव का उल्लेख किया था। उस समय झिरना को “पिपरिया” नाम से जाना जाता था। पुस्तक में इसे कवर्धा रियासत का महत्वपूर्ण गांव बताया गया है, जहां साप्ताहिक बाजार लगता था और बड़े मेलों में हजारों लोगों की भीड़ जुटती थी।
गांव की पहचान यहां फैली सुगंधित केवड़े की झाड़ियों से भी है। प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण झिरना को खास बनाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यहां कभी नागा संत लक्ष्मणानंद जैसे साधु-संतों ने तपस्या की थी। गांव में यह भी मान्यता प्रचलित है कि इसकी सीमा में सर्पदंश का असर नहीं होता।
पंचायत का लेखा-जोखा
ग्राम पंचायत: चरडोंगरी
जनसंख्या: 556
साक्षरता दर: 68.8 प्रतिशत
जिला मुख्यालय से दूरी: लगभग 12 किलोमीटर
कनेक्टिविटी: एनएच-30 से पिपरिया होते हुए झिरना गांव तक पहुंचा जा सकता है। मुख्य मार्ग से दूरी लगभग 2 किलोमीटर।
प्रमुख आकर्षण: प्राचीन शिव मंदिर, नर्मदा कुंड और केवड़े की सुगंधित





