आठ साल से रेल का इंतजार कर रEnter sub title hereहा कवर्धा, 8 हजार करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी… अब पटरी पर कब दौड़ेगी ट्रेन?
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल कॉरिडोर में शामिल है कबीरधाम जिला, 27 अक्टूबर को राज्य कैबिनेट ने दी वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी; लेकिन निर्माण शुरू होने और पहली यात्री ट्रेन चलने की तारीख अब भी साफ नहीं

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कवर्धा। जिले के लोगों के लिए रेल सुविधा आज भी एक बड़ा सपना बनी हुई है। आठ साल पहले कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद जगी थी कि अब कबीरधाम जिला भी रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा, लेकिन वर्षों गुजरने के बाद भी कवर्धा में रेल की पटरी नहीं पहुंच सकी। अब करीब 8 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हुई है। 27 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने परियोजना में राज्य सरकार की वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी दी है। इसके बाद जिले के लोगों की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कवर्धा को रेल सुविधा कब मिलेगी?
2018 में मिली थी मंजूरी, फिर क्यों अटक गई परियोजना?
कटघोरा से डोंगरगढ़ तक लगभग 295 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को 26 सितंबर 2018 को केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दी थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत 5,950.47 करोड़ रुपये थी। प्रस्तावित रेल मार्ग कटघोरा, तखतपुर, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचना है। इस रेल कॉरिडोर से कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम और राजनांदगांव जिले लाभान्वित हो सकते हैं।
हालांकि, परियोजना को मंजूरी मिलने के बावजूद रेल लाइन का निर्माण आगे नहीं बढ़ सका। सबसे बड़ी बाधा रेल मार्ग के एलाइनमेंट को लेकर रही। 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में सांसद संतोष पांडेय के सवाल के जवाब में रेल मंत्रालय ने बताया कि पूर्व में एलाइनमेंट विवाद के कारण परियोजना शुरू नहीं हो पाई थी। अब यह विवाद सुलझा लिया गया है और मूल स्वीकृत एलाइनमेंट के अनुसार काम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
8 हजार करोड़ की परियोजना, कैबिनेट की मंजूरी से बढ़ी उम्मीद
परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में 27 अक्टूबर 2026 का निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने लगभग 8 हजार करोड़ रुपये की संशोधित अनुमानित लागत वाली कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना में राज्य सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी को मंजूरी दी है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से प्रस्तावित है।
इस वित्तीय व्यवस्था में लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की इक्विटी हिस्सेदारी प्रस्तावित है, जिसमें राज्य सरकार और रेल मंत्रालय की हिस्सेदारी लगभग 1-1 हजार करोड़ रुपये होगी। राज्य सरकार की मंजूरी को परियोजना के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लेकिन कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब निगाहें निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया पर टिकी हैं।
कवर्धा को रेल सुविधा मिलने से बदल सकती है जिले की तस्वीर
रेलवे लाइन शुरू होने से कबीरधाम जिले के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में कवर्धा के लोगों को रेल यात्रा के लिए दूसरे जिलों के रेलवे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। विद्यार्थियों, व्यापारियों, किसानों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को आवागमन में अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ता है।
रेल सुविधा मिलने से रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव सहित अन्य शहरों तक पहुंच आसान हो सकती है। कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। वहीं भोरमदेव मंदिर और भोरमदेव अभयारण्य जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर बनाने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भूमि अधिग्रहण और निर्माण की समय-सीमा पर सबकी नजर
परियोजना के सामने अब भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण, आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां और निर्माण प्रक्रिया जैसी चुनौतियां हैं। जब तक इन प्रक्रियाओं को पूरा कर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाता, तब तक रेल सुविधा मिलने की तारीख तय करना संभव नहीं है।
जिले के लोगों के सामने अब कई सवाल हैं। कवर्धा में रेलवे स्टेशन कहां बनाया जाएगा? कबीरधाम जिले में कितने स्टेशन प्रस्तावित हैं? भूमि अधिग्रहण कब पूरा होगा? निर्माण के लिए टेंडर कब जारी होगा? और सबसे महत्वपूर्ण, पहली यात्री ट्रेन कवर्धा से कब रवाना होगी?
जनता को घोषणा नहीं, अब तारीख चाहिए
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल कॉरिडोर केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि कबीरधाम जिले के आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन विकास से जुड़ी बड़ी उम्मीद है। आठ साल के लंबे इंतजार के बाद परियोजना को लेकर वित्तीय स्तर पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में जिले के जनप्रतिनिधियों और रेलवे अधिकारियों से जनता की अपेक्षा है कि वे परियोजना की स्पष्ट समय-सीमा सार्वजनिक करें।
अब सवाल यह नहीं है कि कवर्धा को रेल सुविधा मिलेगी या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि इसके लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा? क्या आने वाले समय में कवर्धा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की सीटी सुनाई देगी या यह परियोजना एक बार फिर फाइलों तक सीमित रह जाएगी?





