बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, खेतों में सर्वे का इंतजार; कृषि विभाग की सक्रियता पर उठे सवाल
धान की फसल को नुकसान के बाद भी प्रभावित किसानों को राहत का इंतजार, खेतों तक नहीं पहुंच रहे कृषि विभाग के अधिकारी; नुकसान के वास्तविक आकलन को लेकर किसानों में चिंता

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कवर्धा। कबीरधाम जिले में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार हो रही धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका के बीच किसानों के सामने अब अपनी मेहनत और लागत बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। लेकिन दूसरी ओर प्रभावित किसानों को फसल नुकसान के सर्वे और राहत की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कृषि विभाग की मैदानी सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश के कारण धान की फसल प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों को उम्मीद थी कि कृषि विभाग की टीमें गांवों और खेतों तक पहुंचकर फसल नुकसान का जायजा लेंगी और वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगी। लेकिन सर्वे की प्रक्रिया को लेकर किसानों में असमंजस बना हुआ है। किसानों का कहना है कि समय पर नुकसान का आकलन नहीं हुआ तो उन्हें सरकारी सहायता और मुआवजे की प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
खेतों में सर्वे कब, किसानों को जवाब कौन देगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसान बारिश से हुए नुकसान को लेकर परेशान हैं, तब कृषि विभाग की मैदानी टीमें कितनी सक्रिय हैं? क्या जिले के सभी प्रभावित गांवों में सर्वे कराया जा रहा है? क्या वास्तविक नुकसान का आंकड़ा तैयार किया जा रहा है? और प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
अधिकारी से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब
इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारी से दो बार मोबाइल फोन पर संपर्क कर फसल नुकसान के सर्वे, प्रभावित किसानों की संख्या और विभाग की कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकारी की ओर से फोन रिसीव नहीं किया गया। ऐसे में विभाग की ओर से अब तक की गई कार्रवाई और सर्वे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
समय पर आकलन नहीं हुआ तो बढ़ सकती है किसानों की परेशानी
फसल नुकसान का सही आकलन और समय पर सर्वे किसानों को राहत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि मैदानी स्तर पर सर्वे में देरी होती है तो प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। अब देखना होगा कि कृषि विभाग कब तक गांवों और खेतों तक पहुंचकर नुकसान का वास्तविक आकलन करता है और किसानों को राहत दिलाने के लिए क्या कार्रवाई करता है।
जवाबदेही के सवाल
जिले में कितने गांवों में फसल नुकसान का सर्वे पूरा हुआ?
कितने किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है?
सर्वे के लिए कितनी टीमें मैदान में उतारी गई हैं?
प्रभावित किसानों को मुआवजा या अन्य सहायता कब मिलेगी?
कृषि विभाग किसानों को नुकसान की जानकारी और प्रक्रिया से अवगत क्यों नहीं करा पा रहा है?
किसानों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि खेतों में सर्वे और नुकसान के अनुसार राहत की कार्रवाई का इंतजार है।




