मियाद खत्म होने के 22 माह बाद भी पुल अधूरा पहले दे दिया ठेका, बाद में याद आया एप्रोच रोड के लिए जमीन अधिग्रहण

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
बोड़ला तहसील क्षेत्र में सरकारी कामकाज की लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां पुल का ठेका पहले दे दिया गया, लेकिन एप्रोच रोड के लिए जरूरी निजी जमीन का अधिग्रहण समय पर नहीं हो सका। यही वजह है कि निर्माण की तय मियाद खत्म होने के करीब 22 माह बाद भी पूरा प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है।
अमेरा से सिल्ली मार्ग पर नीरा नदी में 117 मीटर लंबे उच्चस्तरीय पुल का निर्माण अक्टूबर 2024 तक पूरा होना था। सितंबर 2026 तक पुल का मुख्य हिस्सा तो तैयार हो चुका है, लेकिन दोनों तरफ बनने वाली एप्रोच रोड का काम पूरा नहीं होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
23 सितंबर 2023 को जारी हुआ था वर्क ऑर्डर
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग के सेतु निर्माण संभाग ने 23 सितंबर 2023 को बिलासपुर के ठेकेदार सुशील कुमार अग्रवाल को 478.96 लाख रुपए का वर्क ऑर्डर जारी किया था। काम पूरा करने की समय सीमा 22 अक्टूबर 2024 निर्धारित की गई थी।
पुल के दोनों ओर एप्रोच रोड के लिए अमेरा गांव की निजी कृषि भूमि की जरूरत थी। जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने से एप्रोच रोड का निर्माण अटक गया। अब वर्ष 2025-26 में मुआवजे का संशोधित प्रस्ताव तैयार किया गया है।
बोड़ला एसडीएम आशुतोष शर्मा के अनुसार, 5-6 किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। इनमें से दो किसान जमीन देने के लिए सहमत नहीं हो रहे हैं, जिसके कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है।
पुल 117 मीटर, एप्रोच रोड 258 मीटर
प्रोजेक्ट में नीरा नदी पर 117 मीटर लंबा पुल तैयार हो चुका है। इसके दोनों तरफ कुल 258 मीटर एप्रोच रोड बनाई जानी है। अमेरा की तरफ 129 मीटर और सिल्ली की तरफ भी 129 मीटर एप्रोच रोड प्रस्तावित है।
एप्रोच रोड के लिए अमेरा गांव की 0.251 हेक्टेयर यानी 2519 वर्गमीटर निजी कृषि भूमि ली जानी है। इससे कुल 7 भूस्वामी प्रभावित हो रहे हैं। दस्तावेजों के अनुसार किसानों को कुल 9 लाख 18 हजार 660 रुपए मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित है।
पहली बारिश में ही धंसने लगी पचरी
पुल पर पूरा हो चुका काम भी सवालों के घेरे में है। पुल के दोनों ओर साइड शोल्डर में पचरी बनाई जा रही है, लेकिन यह काम भी अभी अधूरा है। जो पचरी बनाई जा चुकी है, वह पहली बारिश में ही धंसने लगी है।
इससे निर्माण की गुणवत्ता और सेतु विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पुल को हैंडओवर करने से पहले विभाग को गुणवत्ता की जांच कराने के साथ क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत भी करानी होगी।
भास्कर इनसाइट
ठेका सितंबर 2023 में → काम की मियाद अक्टूबर 2024 → जमीन अधिग्रहण अब तक अधूरा → एप्रोच रोड का काम लंबित
सीधी बात : अनिल प्रसाद, सब इंजीनियर, दुर्ग
सवाल : अब तक काम पूरा क्यों नहीं हुआ?
भू-अर्जन की प्रक्रिया में देरी होने के कारण काम प्रभावित हुआ है। पुल के एक तरफ 7 लोगों की निजी जमीन आ रही है।
सवाल : जब जमीन की जरूरत पहले से थी तो सितंबर 2023 में ठेकेदार को वर्क ऑर्डर क्यों दिया गया?
उस समय भू-अर्जन की प्रक्रिया चल रही थी। बाद में जमीन अधिग्रहण को लेकर कुछ नियमों में बदलाव हो गया।
सवाल : नियम बदलने से दो साल बाद भी एप्रोच रोड क्यों नहीं बन सकी?
भू-अर्जन की प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव हुए थे। इसी वजह से प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।
सवाल : पचरी पहली बारिश में ही धंस गई?
इसकी जानकारी लेकर निर्माण की स्थिति देखी जाएगी।




