2.71 करोड़ के आदिवासी छात्रावास निर्माण पर उठे सवाल, आरसीसी ढलाई में घटिया रेत के उपयोग का आरोप

रेंगाखार जंगल। प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत वनांचल क्षेत्र रेंगाखार में 2 करोड़ 71 लाख 55 हजार रुपए की लागत से निर्माणाधीन 100 सीटर आदिवासी छात्रावास की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भवन की आरसीसी ढलाई में नाले से निकाली गई मिट्टी, गाद, कंकड़ और पत्थर मिश्रित रेत का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
यह छात्रावास आदिवासी विद्यार्थियों को सुरक्षित आवास एवं बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान उपयोग की जा रही रेत में स्पष्ट रूप से मिट्टी, गाद और कंकड़ दिखाई देने का दावा ग्रामीणों ने किया है। उनका कहना है कि इसी सामग्री से कॉलम, बीम और स्लैब की ढलाई की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल गांव से दूर होने का लाभ उठाकर गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मौके पर विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार का साइट इंजीनियर मौजूद नहीं था।
मजदूरों का दावा—घटिया रेत का उपयोग नहीं करने की दी थी सलाह
निर्माण स्थल पर कार्यरत कुछ मिस्त्रियों और मजदूरों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि उन्होंने शुरुआत में ही ठेकेदार को इस रेत का उपयोग नहीं करने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि मिट्टी और गाद युक्त रेत आरसीसी ढलाई के लिए उपयुक्त नहीं होती, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। मजदूरों ने कहा कि वे केवल दिए गए निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं।
शुरुआती निर्माण से ही उठ रहे थे सवाल
ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण के प्रारंभिक चरण में ही प्लिंथ और कॉलम की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी। उनका आरोप है कि कमियों को तकनीकी रूप से दूर करने के बजाय केवल सतही सुधार कर निर्माण आगे बढ़ा दिया गया।
विशेषज्ञ बोले—कमजोर हो सकती है इमारत
सिविल इंजीनियर भजराम पाटिल के अनुसार, आरसीसी निर्माण में साफ एवं मानक गुणवत्ता की रेत का उपयोग अनिवार्य होता है। यदि रेत में मिट्टी, गाद या कंकड़ अधिक मात्रा में हों तो सीमेंट का बंधन कमजोर पड़ जाता है और कंक्रीट की दबाव सहन क्षमता 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में भवन में समय से पहले दरारें, सीलन, प्लास्टर झड़ना तथा सरियों में जंग लगने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अधिकारी बोले—जांच कराएंगे
आरईएस विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) सुरेंद्र पटेल ने कहा कि निर्माण कार्य की शुरुआत में रेत का ग्रेडेशन कराया गया था और वह मानकों के अनुरूप था। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान में उपयोग की जा रही रेत की गुणवत्ता पर शिकायत मिली है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
वहीं विभागीय इंजीनियर पावेन्द्र कुमार घंघोरी ने बताया कि स्लैब ढलाई के दौरान निरीक्षण किया गया था और उस समय रेत संतोषजनक पाई गई थी। उन्होंने कहा कि यदि बाद में लाई गई सामग्री में कोई कमी है तो उसकी भी जांच की जाएगी।





