बीमार छात्रा की मौत ने खोली आश्रम व्यवस्था की पोल: बेहोशी की हालत में परिजनों को सौंपा, इलाज से पहले रास्ते में तोड़ा दम
अमेहरा कन्या आश्रम की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

कवर्धा। बोड़ला विकासखंड के शासकीय कन्या आश्रम अमेरा (सोनतरा) में अध्ययनरत कक्षा सातवीं की छात्रा बबीता पंद्राम की संदिग्ध बीमारी के बाद इलाज के अभाव में मौत हो जाने से आश्रम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बावजूद उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया गया और बेहोशी की हालत में बिना किसी जिम्मेदार कर्मचारी के उनके हवाले कर दिया गया।
मृतक छात्रा के पिता धनीराम पंद्राम ने बताया कि 26 जुलाई की शाम आश्रम से फोन कर बेटी के बीमार होने की सूचना दी गई। अगले दिन सुबह जब वे आश्रम पहुंचे तो उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। उनकी बेटी बेहोश थी और आश्रम की अधीक्षिका भी मौके पर मौजूद नहीं थीं। आश्रम का कोई कर्मचारी भी बच्ची के साथ अस्पताल नहीं गया। मजबूरी में वे अपनी बेटी को बाइक से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन कवर्धा ले जाते समय रास्ते में ही छात्रा ने दम तोड़ दिया।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती और आश्रम प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी निभाता, तो संभवतः छात्रा की जान बचाई जा सकती थी।
तीन दिन बाद जागा प्रशासन, जांच समिति गठित
घटना के तीन दिन बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति में अपर कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी तथा आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को शामिल किया गया है। समिति को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
जिले के आश्रम-छात्रावासों में बीमार बच्चों की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी आदिवासी बालक आश्रम कुई तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा छात्रावास पोलमी में इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। आरोप है कि पूर्व मामलों में भी जांच हुई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना ने आदिवासी आश्रमों में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।




