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किसानों से बड़ा धोखा: 60% पोटाश लिखी बोरी में लैब जांच में निकला 0%, कृषि केंद्र सील, एफआईआर की तैयारी

कवर्धा। खरीफ सीजन में किसानों को कथित तौर पर नकली पोटाश खाद बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। बोड़ला स्थित गोलू कृषि केंद्र से लिए गए एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) खाद के नमूने की लैब जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बोरी पर 60 प्रतिशत पोटाश अंकित था, लेकिन जांच में पोटाश की मात्रा शून्य (0%) पाई गई। इसे उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 की कंडिका 19(ए) का उल्लंघन माना गया है।
जांच के बाद कृषि विभाग ने संबंधित दुकान और गोदाम को सील कर दिया है। मौके पर करीब 1 टन खाद रखा मिला। विभाग ने यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी के नमूने भी जांच के लिए भेजे हैं। मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
5 घंटे की पूछताछ, एक भी वैध बिल नहीं मिला
कृषि विभाग की टीम ने गोलू कृषि केंद्र में करीब पांच घंटे तक जांच की। अधिकारियों ने खाद की खरीदी-बिक्री, स्टॉक और परिवहन से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन संचालक कोई वैध बिल या रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ में उसने खाद पोंडी क्षेत्र से लाने की बात कही। अब विभाग यह पता लगा रहा है कि खाद वहां किस स्रोत से आई और इसकी आपूर्ति किसने की।
पहले भी हुई थी कार्रवाई, फिर कैसे पहुंची नकली खाद?
इसी कृषि केंद्र पर 13 फरवरी 2026 को भी अमानक खाद मिलने पर कार्रवाई हो चुकी थी। इसके बावजूद दोबारा संदिग्ध खाद किसानों तक पहुंचना विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। कृषि विभाग पुराने रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है।
विजय ट्रेडर्स में मिला अवैध खाद का भंडारण
पांडातराई स्थित विजय ट्रेडर्स में जांच के दौरान लगभग 900 बैग डीएपी, सिंगल सुपर फॉस्फेट और अन्य उर्वरकों का अवैध भंडारण मिला। दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर दुकान को सील कर दिया गया है। विभाग ने संचालक को नोटिस जारी कर खरीदी-बिक्री से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
दो लाइसेंस निलंबित, 41 दुकानों को नोटिस
खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण रोकने के लिए गठित टीम ने पुस्कल एग्रोटेक और बलराम कृषि केंद्र के लाइसेंस 14-14 दिनों के लिए निलंबित कर दिए हैं। जांच में इन प्रतिष्ठानों पर स्वीकृत कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियों के उत्पाद रखे मिले तथा स्टॉक रजिस्टर में भी अनियमितताएं पाई गईं। इसके अलावा जिले की 41 दुकानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
विशेष जानकारी
प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि पोंडी क्षेत्र में नकली खाद तैयार कर ब्रांडेड कंपनियों की बोरियों में भरकर बेचने का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। लैब में पोटाश की मात्रा शून्य मिलने से अधिकारियों को संदेह है कि यह किसी कंपनी का रिजेक्टेड माल नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया नकली उर्वरक हो सकता है। कृषि विभाग अब सप्लाई चेन की जांच कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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