सुप्रीम कोर्ट से मोहम्मद अकबर को झटका, अशोक साहू के खिलाफ चुनावी आरोप खारिज
12 साल पुराने कवर्धा चुनाव विवाद का कानूनी पटाक्षेप

कवर्धा। वर्ष 2013 के कवर्धा विधानसभा चुनाव से जुड़ा बहुचर्चित कानूनी विवाद अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर द्वारा भाजपा के पूर्व विधायक अशोक साहू के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। करीब 12 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने रिकॉल आवेदन भी खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई 2026 को सुनवाई करते हुए कहा कि पूर्व आदेश वापस लेने का कोई वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। इससे पहले 12 फरवरी 2026 को अदालत ने यह कहते हुए अपील समाप्त कर दी थी कि संबंधित विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और चुनाव याचिका पहले ही निरस्त की जा चुकी है।
2013 चुनाव के बाद शुरू हुआ था विवाद
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में कवर्धा सीट से भाजपा प्रत्याशी अशोक साहू विजयी घोषित हुए थे। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अकबर ने चुनाव खर्च सीमा उल्लंघन और कथित भ्रष्ट आचरण के आरोप लगाते हुए चुनाव याचिका दायर की थी।
यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।
हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मोहम्मद अकबर की ओर से चुनाव खर्च और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों से जुड़े कई आरोप लगाए गए थे। हालांकि वर्ष 2016 में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और सीडी कानूनी मानकों के अनुरूप प्रमाणित नहीं किए जा सके।
अदालत ने यह भी माना कि चुनाव परिणाम प्रभावित होने संबंधी दावे पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं हो पाए।
राजनीतिक हलकों में फिर चर्चा तेज
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे जनादेश और सत्य की जीत बताया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे इस मामले का अब कानूनी रूप से पूरी तरह पटाक्षेप हो चुका है।
अशोक साहू ने जताया आभार
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक अशोक साहू ने कहा कि उन्हें शुरू से न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था। उन्होंने क्षेत्र की जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।





