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सरकार ने बचाई सकरी नदी, भू-माफियाओं ने बनाया प्लॉटिंग का अड्डा: करोड़ों की संरक्षण योजना पर अतिक्रमण का हमला

बृजेश गुप्ता
कवर्धा। कभी कवर्धा शहर की जीवनरेखा रही सकरी नदी आज अवैध अतिक्रमण और प्लॉटिंग के कारण अपने अस्तित्व पर संकट झेल रही है। जिस नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए सरकार ने करीब 4.12 करोड़ रुपये खर्च किए, उसी नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अब 10 से 12 फीट तक मिट्टी और मुरुम डालकर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। इससे न केवल नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है, बल्कि भविष्य में शहर के सामने बाढ़ और जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं।
समनापुर पुल से श्रीरामजानकी मंदिर घाट तक जिस हिस्से में छह वर्ष पहले प्रशासन ने गहरीकरण, चौड़ीकरण और जल संरक्षण का कार्य कराया था, आज उसी क्षेत्र में अवैध रूप से भराव कर प्लॉट काटे जा रहे हैं। नदी में कभी मोटरबोट चलाने वाला यह इलाका अब भू-माफियाओं की गतिविधियों का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं, हालिया नगर पालिका बजट में इसी स्थान पर रिवर फ्रंट विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
प्राकृतिक जलधारा पर कब्जा, शहर की सुरक्षा पर खतरा
सकरी नदी शहर के जल स्रोतों की प्रमुख धुरी है। नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित किए जाने से भू-जल स्तर प्रभावित होने के साथ-साथ जलभराव और बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। वर्ष 1998 की भीषण बाढ़ इसकी गंभीर चेतावनी रही है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो नदी संरक्षण पर खर्च की गई करोड़ों रुपये की राशि और वर्षों की मेहनत बेकार साबित हो सकती है।
जांच में अवैध प्लॉटिंग की पुष्टि, कार्रवाई अब भी अधूरी
पूर्व में सरकारी नालों और नदी क्षेत्र पर कब्जे की शिकायत मिलने पर राजस्व विभाग ने जांच की थी। जांच में खसरा नंबर 190 एवं 188/1 में लगभग 1.46 हेक्टेयर भूमि पर 10 से 12 फीट तक मिट्टी डालकर अवैध प्लॉटिंग किए जाने की पुष्टि हुई। वहीं घोटिया नाला (खसरा नंबर 137) में मुरुम डालकर रास्ता बनाया गया और आसपास प्लॉट विकसित कर दिए गए।
हालांकि प्रशासन ने इन अवैध प्लॉटों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है, लेकिन मौके पर किया गया भराव, बाउंड्रीवाल और अतिक्रमण अब भी जस का तस बना हुआ है। इससे साफ है कि कागजों में कार्रवाई हुई, लेकिन जमीन पर अतिक्रमण हटाने की ठोस पहल अभी तक नहीं हो सकी है।
10 हजार ग्रामीणों की मेहनत पर फिरा पानी
वर्ष 2017 में सकरी नदी के संरक्षण के लिए 37 किलोमीटर का वैज्ञानिक सर्वे कराया गया था। इसके बाद मनरेगा के माध्यम से नदी की सफाई, गहरीकरण और किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया। करीब 40 पंचायतों के 10 हजार से अधिक ग्रामीणों ने इस अभियान में श्रमदान कर नदी को पुनर्जीवित किया था। आज वही संरक्षित क्षेत्र भू-माफियाओं के कब्जे और अवैध प्लॉटिंग का शिकार बनता जा रहा है।
प्रशासन का पक्ष
एसडीएम चेतन साहू ने बताया कि समनापुर पुल के पास नदी किनारे अवैध प्लॉटिंग का मामला संज्ञान में है। संबंधित प्लॉटों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है। पूर्व में सरकारी नालों पर अतिक्रमण की जांच में कई मामलों की पुष्टि हुई है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई जारी है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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