6मीटर की मंजूरी, 15 मीटर तक उजाड़ दिया जंगल: 3 किमी सड़क के लिए 100 से ज्यादा पेड़ काटे, वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई

कवर्धा। विकास के नाम पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई का मामला कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र से सामने आया है। ग्राम पंचायत अमनिया के आश्रित ग्राम टेढ़ापानी से डेंगूरजाम तक प्रस्तावित सड़क निर्माण में पर्यावरणीय नियमों की खुली अनदेखी किए जाने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्वीकृत चौड़ाई महज 6 मीटर है, लेकिन निर्माण एजेंसी ने 10 से 15 मीटर तक वन क्षेत्र को साफ कर दिया, जिससे बड़ी संख्या में बहुमूल्य वृक्षों की बलि चढ़ गई।
जानकारी के अनुसार जनमन योजना के तहत बनने वाली लगभग 3 किलोमीटर लंबी सड़क कांदावानी बीट क्रमांक-479 एवं रुख्मीदादर बीट क्रमांक-473 के वन क्षेत्र से होकर गुजर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान सरई, महुआ, तेंदू, चार, कुसुम, सेन्हा और कसेही प्रजाति के 100 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया। कई विशाल सरई वृक्षों को जड़ सहित उखाड़ दिया गया, जबकि कुछ पेड़ मिट्टी में दब गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि कटे हुए पेड़ों की लकड़ियां लंबे समय तक सड़क किनारे पड़ी रहीं, जिन्हें बाद में चौकीदारों के माध्यम से कुल्हाड़ी और आरा मशीन से काटकर हटाया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में वन संरक्षण नियमों और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है।
बिजली खंभे भी नहीं बचे
सड़क निर्माण के दौरान तीन बिजली खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे कुछ समय तक क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति प्रभावित रही। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई। साथ ही वन क्षेत्र से निकाली गई मिट्टी का उपयोग सड़क निर्माण में किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
115 करोड़ की सड़क परियोजना पर उठे सवाल
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जिले में 48 सड़कों को मंजूरी मिली है, जिनमें पंडरिया विकासखंड की 25 सड़कें शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 115.02 करोड़ रुपए है। ऐसे में टेढ़ापानी-डेंगूरजाम सड़क का मामला विकास कार्यों में पर्यावरणीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
वन विभाग ने बनाया प्रकरण
मामले में वन विभाग पंडरिया के एसडीओ कीर्तिवर्धन सुखदेव ने बताया कि संबंधित वन अमले से जानकारी ली गई है। पेड़ों की कटाई को लेकर पीओआर (वन अपराध प्रकरण) तैयार किया गया है, जिसमें काटे गए पेड़ों का विवरण दर्ज है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विकास के नाम पर जंगलों के अस्तित्व पर बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है।




