विविध

1.37 करोड़ खर्च, पंचायत भवनों में कैद ट्राइसिकल; खुले में फेंका जा रहा कचरा

दो साल से बंद पड़ी कचरा संग्रहण व्यवस्था, 125 पंचायतों को दी गई थीं 250 ट्राइसिकल

CGN News | बोड़ला/कवर्धा
गांवों से कचरा उठाने और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने 1 करोड़ 37 लाख 50 हजार रुपए खर्च कर 250 ट्राइसिकल खरीदीं। वर्ष 2023-24 में बोड़ला ब्लॉक की 125 ग्राम पंचायतों को दो-दो ट्राइसिकल उपलब्ध कराई गईं। लेकिन इन वाहनों के संचालन की पुख्ता व्यवस्था नहीं बनने से योजना दो साल बाद भी धरातल पर नजर नहीं आ रही है।
कई पंचायतों में ट्राइसिकल पंचायत भवन, स्टोर रूम और शेड में खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं। कुछ वाहनों में टूट-फूट शुरू हो गई है। दूसरी ओर घर-घर कचरा संग्रहण बंद होने के कारण ग्रामीण खुले में कचरा फेंकने को मजबूर हैं।
250 ट्राइसिकल खरीदीं, लेकिन संचालन की व्यवस्था नहीं
एक ट्राइसिकल की लागत करीब 55 हजार रुपए बताई गई है। इस हिसाब से 250 वाहनों की खरीद पर करीब 1 करोड़ 37 लाख 50 हजार रुपए खर्च हुए। योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को घर-घर जाकर कचरा संग्रहण का काम करना था। इसके बदले पंचायतों को 15वें वित्त की राशि से समूहों को मानदेय देना था।
कई पंचायतों में मानदेय का भुगतान नियमित नहीं होने से समूहों ने कचरा संग्रहण का काम बंद कर दिया। इसके साथ ही पंचायतों में उपलब्ध ट्राइसिकल भी खड़ी हो गईं।
बोक्करखार : शेड में खड़ी हैं दोनों ट्राइसिकल
ग्राम बोक्करखार में दो ट्राइसिकल पंचायत भवन के शेड में पड़ी हुई हैं। यहां महिला समूह को घर-घर कचरा संग्रहण की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन मानदेय नहीं मिलने के कारण समूह ने काम बंद कर दिया। इसके बाद दोनों वाहन भी उपयोग से बाहर हो गए। पंचायत की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने से गांव में कचरा संग्रहण प्रभावित है।
राजाडार : उपयोग नहीं हुआ तो खराब होने लगे पार्ट्स
राजाडार पंचायत में करीब 1.10 लाख रुपए की लागत से दो ट्राइसिकल खरीदी गई थीं। दोनों वाहन पंचायत भवन में खड़े हैं। लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण इनके पार्ट्स खराब होने लगे हैं। धूप और बारिश के संपर्क में रहने से वाहनों में जंग भी लग रही है। समय पर रख-रखाव नहीं होने से सरकारी संपत्ति के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
लूप : स्टोर रूम में बंद वाहन, सड़क किनारे कचरा
लूप पंचायत में भी करीब 1.10 लाख रुपए की लागत से दो ट्राइसिकल खरीदी गई थीं। दोनों पंचायत भवन के स्टोर रूम में रखी हैं। पंचायत की आबादी करीब 1400 है, लेकिन घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीण सड़क किनारे और खुले स्थानों पर कचरा फेंक रहे हैं।
जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवाल
सिर्फ ट्राइसिकल खरीदकर पंचायतों को सौंप देना योजना की सफलता नहीं है। वाहनों का नियमित संचालन, महिला समूहों को समय पर मानदेय, कचरा संग्रहण की निगरानी और वाहनों के रख-रखाव की व्यवस्था भी जरूरी थी।
दो साल बाद भी बड़ी संख्या में ट्राइसिकल उपयोग में नहीं आना पंचायत और जनपद स्तर की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्रत्येक पंचायत में वाहन की वर्तमान स्थिति, संचालन और कचरा संग्रहण व्यवस्था की जांच कर पंचायतवार रिपोर्ट तैयार करने की जरूरत है।
स्टाफ की कमी का दिया हवाला
मामले में बोड़ला जनपद पंचायत के सीईओ आकाश सिंह राजपूत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक संजय सोनी ने बताया कि स्टाफ की कमी है। बोड़ला जनपद में स्वच्छ भारत मिशन के तहत पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है।
सवाल : 1.37 करोड़ की संपत्ति का हिसाब कौन लेगा?
125 पंचायतों में 250 ट्राइसिकल की खरीद पर 1.37 करोड़ 50 हजार रुपए खर्च किए गए। अब जब कई वाहन उपयोग में नहीं हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन वाहनों का पंचायतवार संचालन रिकॉर्ड क्या है, कितने वाहन चालू हालत में हैं और कितने खराब हो चुके हैं। सरकारी राशि से खरीदी गई इन संपत्तियों की उपयोगिता और वर्तमान स्थिति की जिम्मेदार विभाग को समीक्षा करनी चाहिए।

Advertisement Advertisement 2

Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button